मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

October 02, 2009

हिन्दी लेखक / हिन्दी ब्लॉगर

हिन्दी लेखक / हिन्दी ब्लॉगर , मेरी नज़र मे ये दोनों , अलग अलग हैं । ज्यादातर हिन्दी ब्लॉगर , हिन्दी मे लिखते हैं पर हिन्दी उनका विषय नहीं हैं । वो हिन्दी को प्यार करते हैं इसलिये हिन्दी मे लिखते हैं । उन मे से बहुत से डॉक्टर , इंजीनियर , सॉफ्टवेर देव्लोपेर , सरकारी संस्थानों मे बडे और ऊँचे पदों पर आसीन , दिल्ली और अन्य विश्व विद्यालयो मे हिन्दी तथा अन्य विषयों के प्रवक्ता , वकील , सेल्फ एम्प्लोयेड हैं ।

अगर चिटठा जगत का सक्रियता क्रम देखे तो पहले ४० चिट्ठो के मालिक सब इतने समर्थ जरुर हैं की १०० रुपए प्रतिमाह दे सके एक अग्रीगेटर की सुविधा उठाने के लिये ।

हिन्दी मे ब्लॉग लिखना महज एक शौक हैं उन लोगो के लिये जो अपने अपने कार्य क्षेत्र मे जीविका के लिये कमा रहे हैं । ब्लॉग लिखना एक व्यसन भी हैं क्युकी इस मे आप के पास इन्टरनेट का खर्चा उठाने की सामर्थ्य भी होनी चाहिये । बहुत से घरो मे आज भी इन्टरनेट नहीं हैं क्युकी उसकी कोई जरुरत नहीं हैं और उसके लिये १००० रुपए माह खर्च नहीं किया जा सकता हैं । आज भी मध्यवर्गी परिवार मे रोटी कपड़ा और मकान ही बेसिक जरुरत हैं ।

जितनी चादर हो पैर उतने ही पसारने चाहिये । अगर आय कम हैं तो या तो कम आय मे रहना आना चाहिये या आय बढ़नी चाहिये ।



हिन्दी ब्लॉगर और हिन्दी लेखक मे फरक हैं मेरी नज़र मे , मेरी नज़र और मेरी सोच ही हैं इस ब्लॉग पर । लोग डायरी को सार्वजनिक करने से डरते हैं क्युकी उसमे व्यक्तिगत एह्साह होते हैं जो हम बाटना चाहते हैं ताकि और क्या सोचते हैं उस विषय मे वो पता चले । और कमेन्ट डिलीट भी करती हूँ जो नहीं पसदं होते क्युकी अपनी डायरी हैं सो पन्ने फाड़े भी जासकते हैं ।

आशा हैं सागर नाहर अब नाराज नहीं रहेगे



आज कल बहुत से लोग दुसरो की डायरी सार्वजनिक कर रहे हैं हम तो अपनी ही कर रहे हैं । और भईया हम १०० रुपए प्रति माह ही दे सकते हैं अग्रीगेटर पर ब्लॉग दिखाना के लिये इस से ज्यादा होगा तो केवल ब्लॉग लिखेगे , अग्रीगेटर पर सदस्यता नहीं लेगे । हम हिन्दी मे अपने लेखन को प्रमोट करने के लिये इतना खर्चा जरुर करेगे । दो ब्लॉग २०० रुपए । पर किसी को डोनेशन नहीं देना पसंद करेगे ।

October 01, 2009

पसंद का चटका लगाने के परमुटेशन कॉम्बिनेशन

पसंद का चटका लगाने के परमुटेशन कॉम्बिनेशन


आप के पास जितने ब्राउज़र हैं एक साथ खोल ले और इस प्रकार से खोले की आप को डेस्कटॉप पर सब एक साथ दिखे।

हर ब्राउज़र मे ब्लॉगवाणी खोल ले
जिस पोस्ट को पसंद करना हैं उसको सब ब्राउज़र मे ऊपर कर ले

अब सब पर पसंद का चटका लगाए पर चटका लगाने की स्पीड बहुत तेज होनी चाहिये ।
सब ब्राउजर बंद कर दे
दुबारा ब्लोग्वानी को किसी भी ब्राउज़र मे खोले अगर ४ ब्राउज़र हैं तो कम से कम पसंद तो आप को दिखी ही जायेगी
ट्रिक ये हैं की इससे पहले की ब्लोगवाणी का सर्वर आपकी पसंद रजिस्टर करे सारे चटके लग चुके हो !!! वो जो चटका लगाने पर गोल गोल घूमता हैं वो घूमना बंद होने से पहले जितने चटकाए उतनी पसंद !!!
नेट बंद कर दे

दुबारा नेट चालू करे
ब्लोग्वानी खोले
जिस पोस्ट पर पसंद चटकानी हैं उसको पसंद कर ले
अब जिस पोस्ट को पसंद किया हैं उसके ऊपर या तो आप को ब्लोग्वानी मे उस ब्लॉगर की तस्वीर , ब्लॉग की तस्वीर या खाली स्थान दीखेगा वहाँ क्लिक करे
एक नया पेज खुल जायेगा जिसमे आप को उस ब्लॉगर की सब पोस्ट दीखेगी
वहाँ आप जिस पोस्ट पर भी चाहे पसंद चटकाते रहे

नेट बंद करे , फिर खोले
अगर आप को अपनी पोस्ट पसदं करनी हैं अपनी पोस्ट खोले
दूसरे ब्राउज़र मे ब्लोग्वानी खोले और ऊपर बाते तरीके से अपनी पुरानी पोस्ट खोले

तीनो जगह एक साथ पसंद का चटका लगाये ३ पसंद यानी आपका ब्लॉग साइड पट्टी पर आगया जहाँ आज की ज्यादा पसंद दिखती हैं

एक बार कोशिश करके देख ले वहाँ भी पसंद का चटका लग सकता हैं


बात सिर्फ़ परमुटेशन कॉम्बिनेशन की हो रही हैं ब्लोगवाणी टीम की सक्षमता या असक्षमता की नहीं


ये ब्लॉग प्रयास कैसा हैं ?

September 30, 2009

ब्लोगवाणी - सदस्यता शुल्क और रंजना की टिप्पणी कल की पोस्ट पर

रंजना said...

आपके प्रस्ताव का मैं पूर्ण समर्थन करती हूँ......आपने मेरे ही मन की बात कह दी.

ब्लोग्वानी या इसी तरह के और भी एग्रीगेटर के रूप में जो इतना बड़ा प्लेटफोर्म उपलब्ध है हिंदी पाठकों को इसकी कीमत अधिकांश लोग बिलकुल ही नहीं समझ नहीं पा रहे...मुझे बड़ा ही अफ़सोस होता है यह देखकर..यदि यह माध्यम उपलब्ध न हो तो लेखक पाठक वर्ग कहाँ से तलाशेंगे...?????????

टीम ने निशुल्क इस सेवा के लिए अपने जेब से जो खर्च किया है या जो समय और श्रम खर्च कर रहे हैं,उसकी क्या कोई कीमत नहीं होनी चाहिए ????

मेरा तो सुझाव है कि टीम कुछ और सुविधाएँ अपने अग्रीगेटर में जोड़ दे और उसके लिए निश्चित शुल्क ले....

ब्लोग्वानी टीम को मैं बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने सेवा फिर से बहाल कर दी...





क्या हिन्दी को नेट पर आगे ले जाने की जिम्मेदारी केवल अग्रीगेटर की हैं ?? और ये तर्क हम कब तक देते रहेगे की "हिन्दी का गरीब लेखक क्या करे ?"

हिन्दी के लेखक कब तक गरीब रहेगे या हिन्दी कब तक गरीबो की भाषा रहेगी या हम केवल दयनीयता का दिखावा करके अपना दामन छुडाते रहते हैं ।

आज ब्लोगवाणी टीम ने एक दिन के लिये अपनी फ्री सेवा अनुपलब्ध कर दी और "त्राहि माम " की गूंज होगई । कल अगर किसी वज़ह से ब्लोगवाणी टीम इस से उकता जाए या इसको ना चला सके तो क्या होगा हिन्दी ब्लोगिंग का ?

क्या इसके लिये जरुरी नहीं हैं की हम स्वाबलंबी बने और एक ऐसा मंच तैयार हो जहाँ हिन्दी ब्लॉगर हिन्दी प्रमोशन के लिये पैसा देकर एक संचालक की सेवाये ले ।
रही बात जो समर्थ हैं तो क्यूँ हम असमर्थ रहना चाहते हैं । क्यूँ हम दूसरो पर निर्भर रहना चाहते हैं । क्यूँ बात डोनेशन की होती हैं और फिर कहा जाता हैं की जो ज्यादा देता हैं उसकी सुनी जाती हैं ।


समय रहते चेत जाये तो बेहतर हैं , १२०० रुपए सालाना प्रति ब्लॉग देकर { या कोई भी निश्चित राशि } अगर हम किसी की सेवाए नहीं उसकी योग्यता से अपने लिखे को आगे बढाए तो इसमे क्या हिन्दी आगे नहीं जायेगी ।
एक दूसरे की पोस्ट पसंद ना पसंद करके हम केवल ग्रुप को ही बढ़ावा देते हैं


अगर आप को ग्रुप को ही बढवा देना हैं तो आप अपनी पसदं का सिंपल और आसन फीड एग्रेगेटर ख़ुद ही बना सकते है और ये सुविधा ब्लॉग स्पॉट पर बहुत पहले से हैं


मेरे लिये पाठक की राय बहुमूल्य हैं , मुझे मुद्दे पर बहस से कोई उज्र नहीं हैं । ब्लोगिंग शगल हैं मुझ जैसो के लिये जो अपने मन की लिखते है और पाठक की राय की प्रतीक्षा करते हैं ।

September 29, 2009

ब्लॉगवाणी पर १२०० रुपए प्रति साल का सदस्यता शुल्क शुरू हो

ब्लॉगवाणी कि वापसी से बहुत से ब्लॉगर के ब्लॉग को साँस लेने कि सुविधा पुनः मिल गयी । ब्लॉगवाणी के ब्लॉग पर मैने कहा हैं ब्लोग्वानी पर सदस्यता शुल्क लगा दे १२०० रुपए प्रति साल और जो ब्लॉगर ये शुल्क दे वही ब्लोग्वानी कि सुविधा को उठाये । सारे झंझट ख़तम । ये ‘माडरेटर” जैसा दर्जा जिस को भी दिया जायेगा उसकी निष्पक्षता तब तक प्रश्नचिन्हित रहेगी जब तक हम कोई शुल्क नहीं देते और ‘माडरेटर”कि बात को एक रुल मानते हैं । इस प्रकार से आप अनजाने मे ही सही एक गुट को बढावा दे रहे हैं ब्लोगिंग मे । क्युकी आप ने इस ब्लॉग पर राय मांगी हैं सो अपनी राय दे रही हूँ ।

अगर हम ब्रॉड बैंड के लिये ३०० - १००० रुपए महिना खर्च कर सकते हैं तो १२०० साल कि सदस्यता ब्लोग्वानी कि ले कर अपने लिखे को पढ़वा भी सकते हैं । जो सदस्यता ना ले वो पढ़ तो सकते हैं पर उनका लिखा
ब्लॉगवाणी पर आयेगा नहींहिन्दी को आगे ले जाने के लिये हम इतना तो कर ही सकते हैंऔर ये सदस्यता शुल्क प्रति ब्लॉग होना चाहियेहिन्दी का प्रचार प्रसार करने के लिये ये राशि कुछ भी नहीं हैं क्युकी ये केवल १०० रुपए प्रति माह होती हैं

पसंद ना पसंद इत्यादि जब सदस्यों के बीचे मे होगी तो किसी को भी आपत्ति नहीं होगी ।

कल मैने एक लिंक देखा हैं जिस जो ये हैं चिठ्ठाजगत । अगर ये जानकारी सही हैं तो क्या वाकई ये सुविधा बिना किसी मकसद के उपलब्ध कराई गयी हैं । अगर नहीं तो ये भ्रांती क्यूँ हैं ।
कोई भी सुविधा अगर दी जाती हैं तो उस पर प्रश्न चिन्ह लगते ही हैं क्युकी आज कल जागरूकता बहुत हैं और जागरूक रहने के साधन भी हैं ।
पारदर्शिता बहुत जरुरी हैं । और पारदर्शिता तभी सम्भव हैं जब हम सब उसके लिये उस के लिये जिम्मेदार हो ।

हिन्दी के प्रचार प्रसार कि बात सब करते हैं पर चिंता सबको केवल और केवल अपने ब्लॉग कि ही होती हैं । हमारा लिखा पढा गया या नहीं यही सब के लिये जरुरी हैं

ब्लोग्वानी के बंद होने से कुछ पोस्ट पर ये भी पढा कि हम विरोध मे पोस्ट नहीं कर रहे , ये कैसा विरोध हैं , ये तो एक प्रकार कि अहम् हैं कि हम इतना अच्छा लिखते हैं कि हम नहीं लिखेगे तो पाठक अच्छा पदने से महरूम हो जाएगा


पसंद पर एक क्लिक मेरी हैं अपना लिखा पसंद ना किया तो क्या किया !!!!