मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

August 10, 2011

देखिये जाकिर कहां से पहुचे हैं और कुश कहां से आ रहे हैं चिट्ठा चर्चा पर

चिट्ठा चर्चा पर जो कमेन्ट कर रहे हैं वो कहा से आ रहे हैं दिख रहा हैं

देखिये जाकिर कहां से पहुचे हैं

और कुश कहां से आ रहे हैं


चर्चा पर कमेन्ट किसने किया और कहां से किया
ज़रा आप भी कर के देखे की आप कहां से पहुचे
तकनीक का सही गलत पता करे
यहाँ

August 08, 2011

काश

कभी कभी सोचती हूँ
क्या कभी
इस हिंदी ब्लोगर समुदाय में
क़ोई ऐसे ब्लोगर होगा
जो जब नए से पुराना हो जाए

ये हकीकत सब के सामने लाये


कि कैसे
उसके ब्लॉग लेखन मे आते ही
यहाँ के सम्मानित जनों ने
एक फहरिस्त
उसको दी थी पकड़ा
और
बताया था कि
कौन क्या क्या हैं
किस से डरना हैं
किस को इग्नोर करना हैं
किस पर कमेन्ट जरुर देना हैं


फिर कैसे उसके भ्रम टूटे
और उस ने पाया कि
जिनको वो आईडियल मानता था
वो दिगभ्रमित खुद ही थे
वो यहाँ केवल अपनी कहने आये थे
मजमे और मसाले मे
मसले जिनको कभी यहाँ ना भाये थे

क्या कभी क़ोई एक भी ऐसा ब्लोगर आयेगा
जो इस सच्चाई से
दूसरो को निर्भीकता से परिचित करायेगा




August 06, 2011

अच्छे लोगो / ब्लोगर गुट में शामिल हो

आप अच्छाई को परिभाषित करना भूल गए ।
और आप ये भी भूल गए नैतिकता केवल एक तरफ़ा होती हैं यानी अपने लिये एक , समाज के लिये Linkदूसरी
आप अच्छाई को परिभाषित करदे , नैतिकता का पैमाना बता दे गुट अपने आप बन जाएगा और जुडने वाले जुड़ जायेगे

आप ने आज तक कभी भी किसी को ये कहते सुना हैं की " मै गलत हूँ , मै गन्दा/ गन्दी हूँ । "



शामिल होने के लिये ऊपर दिया लिंक क्लिक करे

वाणी जी को दे बधाई , २ साल वो यहाँ पूरे कर आई

वाणी जी
बहुत बहुत बधाई , दो साल से आप यहाँ "suffer" कर रही हैं और अब नौबत आप को reform करने तक आ ही गयी हैं । शायद मेरी तरह ५ साल तक "suffer" करने के बाद भी स्थिति यही रहेगी क्युकी कुछ लोग यहाँ ब्लॉग लिखने का नहीं व्यक्तिगत आक्षेपों का अजेंडा लेकर टीप देते हैं ।
ख़ैर एक पूरा पेराग्राफ मेरे ऊपर हैं इस बार , एक साल ख़तम होने पर आप ने महज एक लाइन दी थी । तीसरे वर्ष की पोस्ट पर मेरे ऊपर पोस्ट हो आप से सम्बन्ध इतने प्रगाढ़ हो जाए बिना मिले यही कामना हैं ।
मेरी अदा पर ना जाए उसके कारण हैं कभी ऑनलाइन होगी तो बता दूंगी ।
आप को शुभकामना देने में कंजूसी , उफ़ ये तो ना इंसाफी होगी
वाणी की ज्ञान वाणी
लोगो को छूती रहे
सफ़र शब्दों का चलता रहे
मिलना हो ना हो
मकसद हमारा मिलता हैं
बस दिल को सुकून हैं
की क़ोई हैं
जो जानता हैं की
समय असमय मै हूँ
और रहूंगी

मेरा कमेन्ट