पहली बार आप के आलेख पर आपत्ति दर्ज करा रही हूँ ।
आप का निष्कर्ष "विदेश में रहने वालों के लिए यह मंजर बहुत आम है- यहाँ वो आयें तो अतिथि और हम वहाँ जायें तो डॉलर कमाने वाले!! दोनों तरफ से लूजर और यूँ भी अपनी जमीन से तो लूजर हैं ही!!!" निहायत छोटी सोच का परिचायक लगा
क़ोई भी भारत से आप के यहाँ अगर आता हैं तो आप से पूछ कर ही आता होगा और क्युकी आप आप ने कहा ये आम बात हैं की भारतीये विदेशो में बसे भारतीयों के यहाँ जा कर अतिथि बन जाते हैं तो ये पहला प्रकरण नहीं होसकता । यानी आप स्वयं भी कहीं ना कहीं इसके लिये जिम्मेदार हैं । आप को जब पता हैं भारत से आने वाले गरीब टुट पुन्जिये हैं तो आप को उन्हे न्योता देने की जगह उन से सम्बन्ध ही तोड़ लेना चाहिये ।
हम कितना भी गरीब सही पर जमीर अभी जिन्दा हैं समीर भाई , आशा हैं नाराज नहीं होगे और हो तो क्षमा कर दे पर ये कमेन्ट देना जरुरी था ।
मै अपनी बात भी बता दूँ की मै तो भारत में भी किसी रिश्ते दार के घर नहीं रुकती , होटल में ही रहना पसंद करती हूँ
कनाडा आती तब भी वहीँ करती ।
मेरा कमेन्ट यहाँ
सच बोलना जितना मुश्किल है , सच को स्वीकारना उस से भी ज्यादा मुश्किल है . लेकिन सच ही शाश्वत है और रहेगा मुझे अपने सच पर उतना ही अभिमान है जितना किसी को अपने झूठ से होने वाले फायदे पर होता हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
March 13, 2012
March 10, 2012
समय से बड़ा कुछ नहीं
हिंदी ब्लॉग जगत की रीत हैं निराली
हास्य और फूहड़ हास्य में अंतर जो आज बता रहे हैं
वही आज से बस एक साल पहले
फूहड़ हास्य के लिये चर्चित ब्लॉग पर
टीप खूब दिया करते थे
उन आयोजनों में जहां
फूहड़ हास्य को समानित किया जाता था
ब्लॉग मीटिंग कहते थे
व्यंग कहते थे उस लेखन को जहां
"रचना " पर होती थी
अश्लील पोस्ट और कविता
आज पुरजोर तरीके से
वो अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं
अपने को साहित्यकार बता कर
हिंदी कविता / हास्य को
बचाने की कोशिश कर रहे हैं
कहीं किसी ने आप से पहले भी
हिंदी ब्लॉग जगत में यही कहा था
उसका मज़ाक कभी आप ने उड़ाया था
ये आज आप को याद भी नहीं हैं
क़ोई बात नहीं
समय से बड़ा कुछ नहीं
वही सबको समझाता हैं
और सच एक ना एक दिन
सबके सामने आता हैं
हास्य और फूहड़ हास्य में अंतर जो आज बता रहे हैं
वही आज से बस एक साल पहले
फूहड़ हास्य के लिये चर्चित ब्लॉग पर
टीप खूब दिया करते थे
उन आयोजनों में जहां
फूहड़ हास्य को समानित किया जाता था
ब्लॉग मीटिंग कहते थे
व्यंग कहते थे उस लेखन को जहां
"रचना " पर होती थी
अश्लील पोस्ट और कविता
आज पुरजोर तरीके से
वो अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं
अपने को साहित्यकार बता कर
हिंदी कविता / हास्य को
बचाने की कोशिश कर रहे हैं
कहीं किसी ने आप से पहले भी
हिंदी ब्लॉग जगत में यही कहा था
उसका मज़ाक कभी आप ने उड़ाया था
ये आज आप को याद भी नहीं हैं
क़ोई बात नहीं
समय से बड़ा कुछ नहीं
वही सबको समझाता हैं
और सच एक ना एक दिन
सबके सामने आता हैं
February 20, 2012
शिवरात्रि देवो के देव महादेव - स्तुति
नमामिशमीशान निर्वाण रूपं।
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।।
निजं निर्गुणं निर्किल्पं निरीहं।
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहं।।
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं।
गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशं।।
करालं महाकाल कालं कृपालं।
गुणागार संसारपारं नतोहं।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गंभीरं।
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।।
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये।।1।।
श्रीशैलशृंगे विबुधातिसंगे तुलाद्रितुंगेऽपि मुदा वसन्तम्।
तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं नमामि संसारसमुद्रसेतुम्।।2।।
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।3।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।
सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।4।।
पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम्।
सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।।5।।
याम्ये सदंगे नगरेतिऽरम्ये विभूषितांगम् विविधैश्च भोगै:।
सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये।।6।।
महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः।
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यै: केदारमीशं शिवमेकमीडे।।7।।
सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरीतीरपवित्रदेशे।
यद्दर्शनात् पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्रयम्बकमीशमीडे।।8।।
सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यै:।
श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि।।9।।
यं डाकिनीशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च।
सदैव भीमादिपदप्रसिद्धं तं शंकरं भक्तहितं नमामि।।10।।
सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।
वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये।।11।।
लापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्।
वन्दे महोदारतरं स्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये॥ 12॥
ज्योतिर्मयद्वादशलिंगकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण।
स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च॥ 13॥
साभार
सभी को शिवरात्रि की बधाई । जिस धर्म के रक्षक के
गले में सर्प हो , मस्तक पर गंगा ,
हाथ में त्रिशूल
आसन हो सिंह का
और वाहन हो बैल का
उस धर्म को नष्ट करने का सोचने वाले फिर सोचे ।
हिन्दू सहन शील हैं रहेगा पर कमजोर और डरपोक , अरे ये भ्रम ना पाले
ॐ हर हर महादेव
गले में सर्प हो , मस्तक पर गंगा ,
हाथ में त्रिशूल
आसन हो सिंह का
और वाहन हो बैल का
उस धर्म को नष्ट करने का सोचने वाले फिर सोचे ।
हिन्दू सहन शील हैं रहेगा पर कमजोर और डरपोक , अरे ये भ्रम ना पाले
ॐ हर हर महादेव
February 13, 2012
" बी माई वैलेंटाईन " कहने से पहले ज़रा रुके वरना कहीं हंसी के पात्र ना बन जाए आप
वैलेंटाईन डे
क्या आप जानते हैं की जिस साल फरवरी में २९ दिन होते हैं उस साल " बी माई वैलेंटाईन " का आवाहन पुरुष नहीं स्त्री करती हैं
हर चार साल में एक बार स्त्री को अवसर होता हैं अपने प्यार का इजहार करने के लिये उस व्यक्ति से जिस को वो बी माई वैलेंटाईन कहना चाहती हो
बसंत प्रेम का पर्व हैं और भारत में मनाया जाता हैं
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