मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

June 30, 2011

मठाधीश के बाद मठ की जानकारी बिना किसी सक्रियता क्रम

मठ 1
जीतेंद्र , पंकज , देबाशीष , संजय , पंकज , अनूप
मठ 2
अनूप , समीर , शिव , ज्ञान ,
मठ 3
मसिजीवी , प्रत्यक्षा , प्रमोद , सुजाता , नीलिमा
मठ 4
विपुल , आलोक , शास्त्री , अनूप

मठ 5
समीर , मसिजीवी , मैथिली , साइरस
मठ 6
ताऊ {भरत } , समीर , राज
मठ 7
अमर , अनुराग , कुश ,
मठ 8
शास्त्री , अरविन्द ,
मठ 9
अनूप , अमर , कुश

मठ 10
सलीम , जाकिर ,
मठ 11
जाकिर , रविन्द्र , अरविन्द , महफूज
मठ 12
सतीश , अरविन्द , अमर , समीर , गिरिजेश , खुशदीप , महफूज
मठ 13
घुघूती , रचना , रेखा , अंशुमाला ,
मठ 14
अदा , वाणी ,रश्मि , मिथिलेश , महफूज , खुशदीप , अजीत , अरविन्द , बी अस , अलबेला , अजय , राज , समीर
मठ 15
अरविन्द , अलबेला , अजय , बी एस , राज , नरेश ,
मठ 16
अजय , बी एस , दिनेश
मठ 17
बी एस , रवि , अजय , ज्ञान , राजेश ,




मठाधीश के बाद मठ की जानकारी बिना किसी सक्रियता क्रम के गठ बंधन टिपण्णी के आदान प्रदान के चलते बनते बिगड़े हैं ना की विचारो के
दिस्क्लैमेर
its all based on writers observation
and names are not brand names they are merely how you want the world to address you
any resemblence with your name is mere coincidence and its also a coincidence that you and the name here blog

the post is merely a figment of imagination !!!!!!!!!!

June 29, 2011

हे नर , क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुम

हे नर

क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुम
कि नारी को हथियार बना कर
अपने आपसी द्वेषो को निपटाते हो

क्यों आज भी इतने निर्बल हो तुम
कि नारी शरीर कि
संरचना को बखाने बिना
साहित्यकार नहीं समझे जाते हो

तुम लिखो तो जागरूक हो तुम
वह लिखे तो बेशर्म औरत कहते हो

तुम सड़को को सार्वजनिक शौचालय
बनाओ तो जरुरत तुम्हारी है
वह फैशन वीक मे काम करे
तो नंगी नाच रही है

तुम्हारी तारीफ हो तो
तुम तारीफ के काबिल हो
उसकी तारीफ हो तो
वह "औरत" की तारीफ है

तुम करो तो बलात्कार भी "काम" है
वह वेश्या बने तो बदनाम है

हे नर
क्यों आज भी इतने कमजोर हो तुम

June 28, 2011

हमे तुम्हारा प्यार नहीं तुम्हारा कर्तव्य चाहिये


पुरानी पीढी बोली

नयी पीढी से

तुम क्या जानो

हमने क्या क्या किया हैं अपने

माता पिता के लिये

अब अगर करनी को कथनी का

साक्ष्य चाहिये

तो करनी और कथनी के अन्तर को

हर पुरानी पीढी

नयी पीढी को

समझाती ही रहेगी

श्रवण कुमारो की तादाद

पीढी दर पीढी

साक्ष्य के लिये

धूल भरे रास्तो पर

चलती रहेगी

बच्चे कभी जवान नहीं

सीधे बूढे ही बनेगे

और हर नयी पीढी के करमो को

पुरानी पीढी रोती रहेगी

हमने तुम्हे पैदा किया

तुम हमको ढोते रहो

क्युकी हमे तुम्हारा

प्यार नहीं तुम्हारा कर्तव्य चाहिये

June 27, 2011

मेरी पसंद के दो रुख

मेरे लिये मेरे से जो उम्र में कम हैं अगर उनको मेरी बात सही लगती हैं तो मुझे लगता हैं समाज सही दिशा में चल रहा हैं क्युकी आने वाला समाज नयी पीढ़ी से बनता हैं

इसके अलावा मुझे ये भी महसूस होता हैं की शायद में समय आगे हूँ इसीलिये आगे आने वाले समय के लोग मुझे बेहतर समझ पाते हैं

वैसे हर तस्वीर का एक दूसरा रुख भी होता हैं
यानी मेरा लेखन इतना अपरिपक्व हैं की मुझ से उम्र मै बड़े लोग उसको नकार देते हैं और
समकालीन पढने लायक समझते ही नहीं