हम तो विचार को thought समझते थे अब आपके आइडिया से विचार idea हैं ये नयी thought हैं वैसे
‘हिंदी में आइडिया” और “हिंदी का आईडिया” भी महज एक thought हैं
मेरा कमेन्ट
सच बोलना जितना मुश्किल है , सच को स्वीकारना उस से भी ज्यादा मुश्किल है . लेकिन सच ही शाश्वत है और रहेगा मुझे अपने सच पर उतना ही अभिमान है जितना किसी को अपने झूठ से होने वाले फायदे पर होता हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
August 06, 2011
August 05, 2011
मेरा कमेन्ट
मेरा कमेन्ट
अब तो सबके कमेन्ट आ चुके हैं सो कुछ प्रश्न हैं सोचा अब पूछ ही लूँ
इतनी सारी ब्लॉग मीटिंग के बाद
हिंदी को कितना आगे लेजाने में आप सक्षम हुए हैं
ब्लोगिंग को इस से कितना फायदा हुआ हैं
किस सामाजिक समस्या के लिये ब्लॉग समाज जो वास्तविक धरातल पर मिल चुका उसने कुछ किया हैं
क्या मसौदा होता हैं इन मीट का और क्या उस पर कभी बात भी होती हैं
हर बार कहा ये ही जाता हैं { जो ब्लॉग पर पढ़ कर पता चलता हैं } समय अभाव के कारण ब्लोगिंग पर ज्यादा बात नहीं हुई बस मिलना हुआ
केवल और केवल खाना पीना और ग्रुप बना कर एक दूसरे के ब्लॉग पर एक दूसरे की तारीफ़ में पोस्ट लिखना क्या यही हैं हिंदी ब्लॉग्गिंग की सकारात्मकता जिसके इतना बखान होता हैं
और क्या कभी आप ने ब्लॉग पर क़ोई सर्वे किया हैं की जो ज्यादा सक्रिय हैं ब्लोगिंग में वो इन मीटिंग में आते ही नहीं
ये मीटिंग केवल अपने सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देना का माध्यम हैं और उससे ज्यादा कुछ नहीं
इतने चित्र डाल कर क्या हासिल होता हैं की हम कितने प्रिये और पोपुलर हैं
चाय नाश्ता खाना पीना सब ठीक हैं अगर किसी मकसद से मिलना हो तो वर्ना इसको ब्लॉगर मीट कहना फिजूल ही हैं क्युकी ये फैशन हो गया हैं की हम ब्लोग्गर हैं , हम मिले , हम बैठे , हमने बीयर पी , हमने ब्लडी मेरी पिलाई .
ठीक हैं आप को या किसी को शौक हो सकता हैं अपने सामाजिक सरोकार बढाने का पर उसको मीट ना कहा करे . मीट हो तो क़ोई मुद्दा तो हो जिस पर दिस्कुशन हो यहाँ तो गाना बजना , ग़ज़ल कविता होती हैं हम किसी कवि सम्मलेन में नहीं जा रहे और ना ही किसी की ग़ज़ल सुनने ये सब पहले ही बता देना चाहिये ताकि जो लोग आते हैं उनको पता हो किस लिये आना हैं .
स्नेह प्रदर्शन के लिये मीट जरुरी हैं पता नहीं था और स्नेह का प्रदर्शन भी होना चाहिये ये भी पता नहीं था ।

ब्लॉग परिवार का ढोंग करने से क्या हासिल होता हैं
क्या आप के साथ कभी नहीं हुआ की इस परिवार के पीछे आप ने सच को नकार दिया वहाँ कमेन्ट नहीं दिया जहां आप के मित्र ब्लोग्गर गलत लिखते हैं क्या कभी आप की आत्मा ने आप को कचोटा हैं की हाँ मैने गलत किया इस मुद्दे पर अपने ख्याल ना देकर क्युकी ये मेरे दोस्त का ब्लॉग था और मेरे कमेन्ट करने से वो नाराज हो जाएगा
परिवार तो बच जाता हैं सतीश जी पर समाज रीढ़ विहीन हो जाता हैं जब हम मुद्दों से बचते हैं और स्नेह और समझदारी की बात करते हैं केवल इस लिये की टिप्पणी की संख्या में कमी ना आये
अब तो सबके कमेन्ट आ चुके हैं सो कुछ प्रश्न हैं सोचा अब पूछ ही लूँ
इतनी सारी ब्लॉग मीटिंग के बाद
हिंदी को कितना आगे लेजाने में आप सक्षम हुए हैं
ब्लोगिंग को इस से कितना फायदा हुआ हैं
किस सामाजिक समस्या के लिये ब्लॉग समाज जो वास्तविक धरातल पर मिल चुका उसने कुछ किया हैं
क्या मसौदा होता हैं इन मीट का और क्या उस पर कभी बात भी होती हैं
हर बार कहा ये ही जाता हैं { जो ब्लॉग पर पढ़ कर पता चलता हैं } समय अभाव के कारण ब्लोगिंग पर ज्यादा बात नहीं हुई बस मिलना हुआ
केवल और केवल खाना पीना और ग्रुप बना कर एक दूसरे के ब्लॉग पर एक दूसरे की तारीफ़ में पोस्ट लिखना क्या यही हैं हिंदी ब्लॉग्गिंग की सकारात्मकता जिसके इतना बखान होता हैं
और क्या कभी आप ने ब्लॉग पर क़ोई सर्वे किया हैं की जो ज्यादा सक्रिय हैं ब्लोगिंग में वो इन मीटिंग में आते ही नहीं
ये मीटिंग केवल अपने सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देना का माध्यम हैं और उससे ज्यादा कुछ नहीं
इतने चित्र डाल कर क्या हासिल होता हैं की हम कितने प्रिये और पोपुलर हैं
चाय नाश्ता खाना पीना सब ठीक हैं अगर किसी मकसद से मिलना हो तो वर्ना इसको ब्लॉगर मीट कहना फिजूल ही हैं क्युकी ये फैशन हो गया हैं की हम ब्लोग्गर हैं , हम मिले , हम बैठे , हमने बीयर पी , हमने ब्लडी मेरी पिलाई .
ठीक हैं आप को या किसी को शौक हो सकता हैं अपने सामाजिक सरोकार बढाने का पर उसको मीट ना कहा करे . मीट हो तो क़ोई मुद्दा तो हो जिस पर दिस्कुशन हो यहाँ तो गाना बजना , ग़ज़ल कविता होती हैं हम किसी कवि सम्मलेन में नहीं जा रहे और ना ही किसी की ग़ज़ल सुनने ये सब पहले ही बता देना चाहिये ताकि जो लोग आते हैं उनको पता हो किस लिये आना हैं .
स्नेह प्रदर्शन के लिये मीट जरुरी हैं पता नहीं था और स्नेह का प्रदर्शन भी होना चाहिये ये भी पता नहीं था ।

ब्लॉग परिवार का ढोंग करने से क्या हासिल होता हैं
क्या आप के साथ कभी नहीं हुआ की इस परिवार के पीछे आप ने सच को नकार दिया वहाँ कमेन्ट नहीं दिया जहां आप के मित्र ब्लोग्गर गलत लिखते हैं क्या कभी आप की आत्मा ने आप को कचोटा हैं की हाँ मैने गलत किया इस मुद्दे पर अपने ख्याल ना देकर क्युकी ये मेरे दोस्त का ब्लॉग था और मेरे कमेन्ट करने से वो नाराज हो जाएगा
परिवार तो बच जाता हैं सतीश जी पर समाज रीढ़ विहीन हो जाता हैं जब हम मुद्दों से बचते हैं और स्नेह और समझदारी की बात करते हैं केवल इस लिये की टिप्पणी की संख्या में कमी ना आये
August 03, 2011
Wrist Watch
The wrist watch was invented by the Swiss watch maker, Patek Phillippe in the late 1800s; though at first only women wore them.
The man's wristwatch was invented by Louis Cartier in the early 1900s for Mr. Alberto Santos-Dumont. Dumont was working on the development of aircraft and found a pocket watch inconvenient to look at while in the aircraft. He asked his friend Cartier to design a watch for him.
Thomas Jefferson was the one to invent the american wrist watch, which was later worn by Abraham Lincoln.
Read more: http://wiki.answers.com/Q/Who_invented_the_first_wrist_watch#ixzz1TxSgJXQZ
August 02, 2011
मेरा कमेन्ट
ये जो आप बार बार पोल की बात कर रहे हैं ये पोल का तरीका तकनीक का खेल हैं
एक इस आईपी से ब्रोव्सेर बदल कर जितनी बार चाहो वोट दिया जा सकता हैं
और रह गयी बात मुद्दा भटकाने की तो सच्चाई आप ने खुद बयान कर दी हैं
की यौन शोषण गरीब औरतो को ज्यादा होता हैं यानी यौन शोषण के लिये कहीं भी कपड़े जिम्मेदार नहीं हैं
गरीब औरतो में शिक्षा की कमी हैं और वो ये मान कर चलती हैं की क्युकी वो स्त्री हैं इस लिये यौन शोषण होगा ही
यौन शोषण , जेंडर बायस और बलात्कार , इन तीन बातो को कभी भी कहीं भी कहो बात को औरत के कपड़ो पर ले जाया ही जाता हैं और औरत को खुद ही इसका जिम्मेदार बता दिया जाता हैं
आप को एक हफ्ते पहले तक सलट मार्च के पता भी नहीं था और मेरे कमेन्ट के बाद आप ने मुझ से ही इसकी जानकारी मांगी थी और आज आप मुझे ही समझा रहे हैं की मै मुद्दा भटका रही हूँ
क्या ऐसा तो नहीं हैं की मेरी देखा देखी कही और भी नारी भी समानता की बात ना करने लगे
आज तो भारतीये नारी ब्लॉग पर भी इसका समर्थन देख कर अच्छा लगा ।
मेरा कमेन्ट यहाँ
एक इस आईपी से ब्रोव्सेर बदल कर जितनी बार चाहो वोट दिया जा सकता हैं
और रह गयी बात मुद्दा भटकाने की तो सच्चाई आप ने खुद बयान कर दी हैं
की यौन शोषण गरीब औरतो को ज्यादा होता हैं यानी यौन शोषण के लिये कहीं भी कपड़े जिम्मेदार नहीं हैं
गरीब औरतो में शिक्षा की कमी हैं और वो ये मान कर चलती हैं की क्युकी वो स्त्री हैं इस लिये यौन शोषण होगा ही
यौन शोषण , जेंडर बायस और बलात्कार , इन तीन बातो को कभी भी कहीं भी कहो बात को औरत के कपड़ो पर ले जाया ही जाता हैं और औरत को खुद ही इसका जिम्मेदार बता दिया जाता हैं
आप को एक हफ्ते पहले तक सलट मार्च के पता भी नहीं था और मेरे कमेन्ट के बाद आप ने मुझ से ही इसकी जानकारी मांगी थी और आज आप मुझे ही समझा रहे हैं की मै मुद्दा भटका रही हूँ
क्या ऐसा तो नहीं हैं की मेरी देखा देखी कही और भी नारी भी समानता की बात ना करने लगे
आज तो भारतीये नारी ब्लॉग पर भी इसका समर्थन देख कर अच्छा लगा ।
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