मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

July 02, 2013

असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योर्तिगमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।।

ईश्वर हैं या नहीं हैं ये सवाल उठता रहता हैं जवाब भी मिलते रहते हैं .
ईश्वर का निवास कहां हैं ये एक ऐसा सवाल हैं जिसका जवाब सबसे आसन हैं की हर एक जीव के अन्दर ईश्वर विराजमान हैं .
फिर लोग ये मंदिर , गुरुद्वारे और अन्य धार्मिक स्थल पर क्या खोजने जाते हैं .
अभी केदारनाथ में जल सैलाब में हजारो लोग लापता हैं या मृत घोषित हो चुके हैं
अब ये केदारनाथ में क्या खोजने गए थे
क्या शिव केदारनाथ में बसते हैं ??? अगर हाँ तो जो वहाँ गए थे उन्हे तो इस बार शिव ने साक्षात तांडव दिखा कर दर्शन दिये और उन सब को मुक्ति दी हैं फिर इतना हा हा कार क्यूँ ?
मुक्ति की कामना से ही तो लोग चारधाम की यात्रा पर जाते हैं और मुक्त होने पर खुश क्यूँ नहीं हुआ जाता ?

हम सब मानते हैं की ईश्वर की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता फिर इस जल सैलाब से हुई ईश्वर की करनी को आपदा क्यूँ मान रहे

हर कोई कह रहा हैं आपदा प्रबंधन अच्छा नहीं था
अब ईश्वर की मर्ज़ी  नहीं थीं की जो इस बार वहाँ गये हैं वो सब वापिस आये सो कितना भी प्रबंधन किया जाता अंत यही होता जो हुआ हैं

सालो पहले किसी ने केदारनाथ मंदिर बनाया होगा , आज उस मंदिर का ट्रस्ट भी हैं , क्या ईश्वर को ट्रस्ट की जरुरत हैं ? क्यूँ नहीं जो चढावा हैं उसको वैसे ही छोड़ दिया जाए केवल केदारनाथ में ही नहीं हर मंदिर में ताकि जिनके पास ज्यादा हो वो चढा दे और जिनके पास कम हो वो उठा ले क्युकी ईश्वर को किसी चढावे की जरुरत हैं ही नहीं

पहले लोग अपने सब सांसारिक कर्तव्य पूरे करके वानप्रस्थ में आकर जगह जगह ईश्वर को खोजने निकलते थे
कठिन स्थान जहां से गंगा निकलती थी उसको देख कर मुक्ति की कामना करते थे आज कल जो जा रहे हैं उनमे वृद्ध , बच्चे , दुधमुहे बच्चे , नव विवाहित दंपत्ति और गर्भवती स्त्री भी शामिल हैं . इतनी उचाई पर जहाँ ऑक्सीजन कम होती हैं , ठण्ड बहुत होती हैं वहाँ वृद्ध के अलावा जितने जाते हैं वो मात्र टूरिस्ट हैं , वो लोग जो लगे हाथ घुमने के साथ ईश्वर के दर्शन कर , गंगा को देखा कर जीवन सफल करने की कामना रखते हैं .

जब किसी बच्चे की मृत्यु होती हैं या कोई जवान परलोक सीधारता हैं तो लोग कहते हैं ये कोई जाने की उम्र थी ??
लेकिन दूसरी तरफ हम सब मानते हैं की जाता वही हैं जिसकी मृत्यु  निश्चित हैं .

शायद ये सब सैलानी जो आज मुक्त हो चुके इस संसार में अपने सब काम पूरे कर चुके होंगे इसीलिये वो इस यात्रा पर गए क्युकी ईश्वर ने उनके लिये ऐसा ही सोचा था .


हम परेशान क्यूँ होते क्युकी हम ईश्वर के निर्णय पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं अगर हम उसके निर्णय को यथावत स्वीकार करले तो कोई परशानी ही नहीं हैं

लोग कहते हैं धारी देवी की मूर्ति को विस्थापित किया इसलिये ये हुआ , मुझे लगता हैं धारी देवी को पहले से ही पता था की सैलाब में उनका मंदिर डूब जाएगा और उन्होने अपना स्थान बदलने की योजना को कार्यन्वित कर लिया

लोग कहते हैं केदारनाथ का पूरा इलाका जल सैलाब में दूब गया हैं बस मंदिर बचा हैं

सोच कर देखिये मंदिर से ही तो शुरू हुआ था और मंदिर पर ही फिर हम पहुच गए
फिर किस लिये
इतना झूठ
इतना फरेब
इतनी लूट पाट
इतना छल  कपट हम सब करते हैं

आपदा हम सब खुद बढाते हैं , इतने बाज़ार , होटल , हेलीपेड क्या जरुरत थी इन सब की
ईश्वर को शायद वहीँ भक्त अपने द्वार पर चाहिये जो बिना इस सब टीम टाम , ताम झाम के उनसे मिलने आते थे .

ईश्वर सत्य हैं
सत्य ही शिव हैं
शिव ही सुंदर हैं

सत्यम शिवम् सुन्दरम

असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योर्तिगमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।

May 14, 2013

ब्लाग मठ सारावली : भाग - 1 एवम भाग - 2


ब्लाग मठ सारावली : भाग - 1 एवम भाग - 2 ब्लाग मठों की विस्तृत जानकारी देता हुआ ये अनुपम और अनोखा ग्रंथ है जो दो भागों में छपा है. इसमे आपको पाषाणकाल से लेकर आधुनिक काल तक के ब्लाग मठों का इतिहास मिलेगा. यह ग्रंथ खोजपरक और तथ्यपरक सामग्रियों के आधार पर लिखा गया है. यदि आपने यह अनुपम ग्रंथ नही पढा तो आप कभी ब्लाग मठाधीष नही बन पायेंगे. इस पुस्तक के अध्ययन मनन के उपरांत जान पायेंगे कि ब्लाग मठों की कितनी धाराएं और शाखाएं हैं? कौन सा ब्लाग मठ आपकी जरूरत को पूरा कर सकता है? आप एक सफ़ल ब्लाग  मठाधीष बनना चाहते हैं तो सबसे पहले यह अनुपम और अपने आपमे अकेला  ग्रंथ खरीदकर इसका पठन पाठन करें. आपकी सफ़लता सुनिश्चित है. कृपया दोनों भाग एक साथ ही खरीदें जिससे आपको संपूर्ण लाभ मिलेगा. जल्दी करें क्योंकि यह ग्रंथ बडे बडे मठाधीषों ने अग्रिम बुक कर रखा है. तुरंत अपनी प्रति बुक करवा लेवें.










May 02, 2013

प्रोटोकोल क्या कहता हैं , स्टेट फ्यूनरल , झंडे में पार्थिव शरीर को लपेटना किस के लिये मान्य हैं

KAMENT EK
mae is post kae sarbjeet waale hissae se purii tarah ashmat hun

agr ham apne desh me bomb dhamake karnae walo ko sajaa daetey haen to dusrae desho ko bhi adhikaar haen

sarbjeet ek sharbi thaa aesi bhi khabar haen aur sharab pee kar seema par gayaa thaa

ab kyaa yae sarkaar ki jimmedari haen ki wo har sharabi ko pakad kar seema kae andar rakhae

jisnae apnae desh kaa kanun nahin maanaa uskae prati sadbhaw dikhnaa kaunun sahii ho hi nahin saktaa { bhavnatmk rup sae its ok }

ham mae aur dusrae desh me bas itna antar haen ki hamari sarkaar ne " yae nahin kehaa ki sarbjeet bhartiyae nahin haen " jabki wo sarkaar kabhie maanti hi nahin ki hamarey yahaan marne walaa unkae desh kaa thaa

aap sae agrh haen ki aatank sae judae logo , sharabi ityadi kae vishay me likhnae sae pehlae
PLEASE RETHINK
with regards
rachna

KAMENT DO 
KAEMNT TEEN



प्रोटोकोल क्या कहता हैं , स्टेट फ्यूनरल , झंडे में पार्थिव शरीर को लपेटना किस के लिये मान्य हैं ?

बहुत कुछ दिखा ७ साल की हिंदी ब्लोगिंग में . हर साल लोग सोचते हैं "अब गयी "

नज़र अपनी अपनी समझ अपनी अपनी . ६ साल के बाद हिंदी ब्लॉग लेखन
पाठक संख्या ३६५ कमेन्ट लगभग ४० 
५ साल होगये पता भी नहीं चला , मै यहाँ खुश होने आयी थी , खुश करने नहीं और मै उस मकसद में कामयाब हूँ ।
पाठक संख्या ४०६ कमेन्ट २९ 


एक और साल होगया हैं हिंदी में ब्लॉग लेखन करते हुए . इस पूरे साल में खुद ही बहुत कम सक्रिय रही लिखने में लेकिन पढना बदस्तूर जारी रहा . 
बहुत बदलाव दिखा ब्लॉग सम्बन्धो मे 
इस पोस्ट पर मठाधीश के बाद मठ की जानकारी बिना किसी सक्रियता क्रम दिये हुए संबंधो में बहुत बदलाव आया हैं . बहुत से जो नेट वर्किंग के लिये ब्लॉग का इस्तमाल करते थे अब नेटवर्किंग साइट्स पर ब्लोगिंग करते हैं 

इस साल बहुत से ब्लॉगर प्रिंट मीडिया में साहित्यकार बन गए यानी उनकी पुस्तके छप गई हैं या यूँ कहिये ब्लॉग पर जो उन्होने लिखा हैं उसको पैसा देकर उन्होने छपा लिया हैं एक पुस्तक के रूप में . इस साल जैम कर पुस्तक विमोचन हुए हैं हिंदी ब्लॉगर की किताबो के . 

फिर भी लोग कहते हैं ब्लोगिंग में पैसा नहीं हैं :) पब्लिशर की रोजी रोटी का जुगाड़ तो कर ही दिया हैं हिंदी ब्लॉग / ब्लॉगर ने . और साहित्यकार तो पैसे वाले ही बन सकते हैं , इस साल ये पूरी तरह से निश्चित हो गया हैं की हिंदी ब्लॉगर के पास पैसा हैं इस लिये वो साहित्यकार बनने में सक्षम हैं . 

इसी ब्लॉग नेट वर्क के जरिये लोगो ने इतना पैसा इकठा कर लिया हैं किताबे छपा कर की वो अपनी खुद की साईट पर अपना अखबार चला रहे हैं लेकिन ऐसी जानकारियों को छुपा कर रखते हैं और "ब्लॉग परिवार " के साथ नहीं बाँटते हैं 


जिन्होने 'सहभागिता " से पुस्तके छपवाई हैं अब उनको बेचने का जिम्मा भी उन्ही का हैं . तमाम किताब बेचने वाली साईट पर ये पुस्तके उपलब्ध हैं यानी उन साईट का भी फायदा . 

फिर लोगो कहते हैं हिंदी ब्लॉग लेखन में पैसा नहीं हैं :)

एक ही पुस्तक की समीक्षा ना जाने कितने ब्लॉग पर पढने को मिल जाती हैं और सब " सकारात्मक " समीक्षाए हैं मजेदार बात ये हैं की जो समीक्षा करते हैं उन्होने शायद ही कभी उस ब्लॉग पर जा कर कमेन्ट दिया हो जिस को पुस्तक का रूप दिया गया हैं . 

बहुत कुछ दिखा ७ साल की हिंदी ब्लोगिंग में . हर साल लोग सोचते हैं "अब गयी " पर व्यक्ति संबंधो की लिस्ट बढ़ रही हैं मै बस यही कहूंगी