फ्री पानी , राशन पानी , सस्ता पानी , महंगा पानी
सच बोलना जितना मुश्किल है , सच को स्वीकारना उस से भी ज्यादा मुश्किल है . लेकिन सच ही शाश्वत है और रहेगा मुझे अपने सच पर उतना ही अभिमान है जितना किसी को अपने झूठ से होने वाले फायदे पर होता हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
December 31, 2013
December 28, 2013
नैतिक आचरण सबसे पहले खुद करना होगा , सबसे पहले ईमानदार खुद को बनाना होगा
मेहनत, लगन और धारा के विपरीत चल कर , केवल और केवल ईमानदारी के बलबुत्ते पर भी इंसान भारत में तरक्की कर सकता हैं। ये बात अरविन्द केजरी वाल ने मुख्यमंत्री कि शपथ लेने के साथ ही प्रूव कर दिया।
देश में सुधार सत्ता में रह कर लाया जाए इस से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता हैं
नैतिक आचरण सबसे पहले खुद करना होगा , सबसे पहले ईमानदार खुद को बनाना होगा
कभी इस देश मे ऐसा भी वक्त आये
अरविन्द केजरीवाल प्रधानमंत्री
किरण बेदी राष्ट्रपति बन जाए
खुद ईमानदार होते हुए भी जब इंसान गरीब होता हैं और बेईमान को अमीर देखता हैं तो शायद रास्ता दिखना बंद हो जाता हैं
देश में सुधार सत्ता में रह कर लाया जाए इस से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता हैं
नैतिक आचरण सबसे पहले खुद करना होगा , सबसे पहले ईमानदार खुद को बनाना होगा
कभी इस देश मे ऐसा भी वक्त आये
अरविन्द केजरीवाल प्रधानमंत्री
किरण बेदी राष्ट्रपति बन जाए
December 22, 2013
KEJRIWAL MEANS CHANGE
politicians think that Politics is for them only , its they who can do
some thing for the nation ,its their children who can take this up as
profession . Politicians have created a CLASS which seems to have
shattered like GLASS
Whether Kejriwal succeeds or not as a politician time will tell but he has proved that those people who are thrown away by the administration and bureaucracy and political parties can BRING IN A SILENT REVOLUTION ,
KEJRIWAL MEANS CHANGE
Whether Kejriwal succeeds or not as a politician time will tell but he has proved that those people who are thrown away by the administration and bureaucracy and political parties can BRING IN A SILENT REVOLUTION ,
KEJRIWAL MEANS CHANGE
November 18, 2013
मै सचिन के खेल की ही नहीं सचिन की फैन हूँ
सचिन को भारत रत्न सम्मान से उस दिन सम्मानित किया गया जिस दिन उन्होने गेम से संन्यास लिया। २२ गज पर निरंतर २४ साल तक सचिन भागते रहे। अपनीं जिंदगी के २४ साल उन्होने क्रिकेट को दिये और बदले में क्रिकेट ने उनको वो सब कुछ दिया जिसकी कामना हम सब करते हैं।
सचिन को भारत रत्न कहना सही हैं क्युकी सचिन ने माध्यम से भारत को गौरव के शिखर पर हमेशा खड़ा किया , एक समय वो भी था जब भारत कि टीम कि हार के बाद मोहमद कैफ का घर फैंस ने नाराज हो कर जला दिया था उस समय सचिन ने टीम कि तरफ से देश से माफ़ी भी मांगी थी।
रश्क होता हैं सचिन कि माँ से जो अपनाए जीवित रहते अपने बेटे को " भारत रत्न " बनते देख सकी। वो देख सकी अपने बेटे का अर्जित सम्मान , वो देख सकी जिस बच्चे को उन्होने अच्छा इंसान बनने के संस्कार दिये उसने एक अच्छा इंसान बन कर दिखाया।
काश हम अपने अभिभावको के दिये गए दिशा निर्देशो में "अच्छा इंसान बनो " के दिशा निर्देश का सम्मान करे।
आज लोग कह रहे हैं सचिन से ज्यादा दूसरे खिलाडी इस सम्मान के अधिकारी हैं जरुर हैं और इसी लिये सचिन ने कहा उन्होने ये सम्मान हर उस खिलाड़ी के लिये लिया हैं।
मैने हमेशा माना कि मे सचिन के खेल कि नहीं सचिन कि फैन हूँ
एक लम्बी लिस्ट हैं क्रीतिमानो क्रिकेट दौर की । इस सब से ऊपर भी एक बात हैं जो बहुत महत्व पूर्ण हैं । एक सेलेब्रिटी हैं सचिन और फिर भी इस पूरे २० साल मे कही भी उनके किसी भी प्रेम प्रसंग का अपने विवाहित जीवन से इतर को उल्लेख नहीं आया हैं । अपने से ५ साल बड़ी महिला से प्रेम विवाह कर के , दो बच्चों के पिता बनके सचिन "एक पूर्ण पुरूष " की भूमिका मे ही रहे । दूसरे सेलेब्रिटी की तरह ना तो उनके कोई ऐसी संतान हैं जिसको वो "गलती " का नाम देते हैं और ना ही कोई ऐसी "प्रेमिका " हैं जिसको वो "भूलने " का दिखावा करते हैं ।
जिन्दगी सीधे रास्ते से भी जी जाती हैं और जीनी चाहिये और इसकी मिसाल हैं सचिन जो एक सच्चे देश भक्त भी हैं । उनके लिये "इंडिया " से ज्यादा कुछ नहीं क्रिकेट भी नहीं । वो सचिन ही थे जिन्होने सबसे पहले कारगिल युद्घ के बाद पाकिस्तान जा कर क्रिकेट खेलने से मना किया था ।
हमारी कामना हैं की ईश्वर ऐसे सचे इंसान और बनाता चले जो देश के लिये मर मिटना का जज्बा रखते हो और अपनी जिंदगी सही तरह से जीते हो । जो लोग भी " मिल सकता हैं " को केवल इस लिये ना ले क्युकी वो "ग़लत " हैं वही लोग इंसान कहलाने के हकदार होते हैं ।
गलत को रोकना मुश्किल हो सकता हैं पर गलत को ना करना बहुत आसन होता हैं और सचिन इस की मिसाल हैं ।
सचिन को भारत रत्न कहना सही हैं क्युकी सचिन ने माध्यम से भारत को गौरव के शिखर पर हमेशा खड़ा किया , एक समय वो भी था जब भारत कि टीम कि हार के बाद मोहमद कैफ का घर फैंस ने नाराज हो कर जला दिया था उस समय सचिन ने टीम कि तरफ से देश से माफ़ी भी मांगी थी।
रश्क होता हैं सचिन कि माँ से जो अपनाए जीवित रहते अपने बेटे को " भारत रत्न " बनते देख सकी। वो देख सकी अपने बेटे का अर्जित सम्मान , वो देख सकी जिस बच्चे को उन्होने अच्छा इंसान बनने के संस्कार दिये उसने एक अच्छा इंसान बन कर दिखाया।
काश हम अपने अभिभावको के दिये गए दिशा निर्देशो में "अच्छा इंसान बनो " के दिशा निर्देश का सम्मान करे।
आज लोग कह रहे हैं सचिन से ज्यादा दूसरे खिलाडी इस सम्मान के अधिकारी हैं जरुर हैं और इसी लिये सचिन ने कहा उन्होने ये सम्मान हर उस खिलाड़ी के लिये लिया हैं।
मैने हमेशा माना कि मे सचिन के खेल कि नहीं सचिन कि फैन हूँ
एक लम्बी लिस्ट हैं क्रीतिमानो क्रिकेट दौर की । इस सब से ऊपर भी एक बात हैं जो बहुत महत्व पूर्ण हैं । एक सेलेब्रिटी हैं सचिन और फिर भी इस पूरे २० साल मे कही भी उनके किसी भी प्रेम प्रसंग का अपने विवाहित जीवन से इतर को उल्लेख नहीं आया हैं । अपने से ५ साल बड़ी महिला से प्रेम विवाह कर के , दो बच्चों के पिता बनके सचिन "एक पूर्ण पुरूष " की भूमिका मे ही रहे । दूसरे सेलेब्रिटी की तरह ना तो उनके कोई ऐसी संतान हैं जिसको वो "गलती " का नाम देते हैं और ना ही कोई ऐसी "प्रेमिका " हैं जिसको वो "भूलने " का दिखावा करते हैं ।
जिन्दगी सीधे रास्ते से भी जी जाती हैं और जीनी चाहिये और इसकी मिसाल हैं सचिन जो एक सच्चे देश भक्त भी हैं । उनके लिये "इंडिया " से ज्यादा कुछ नहीं क्रिकेट भी नहीं । वो सचिन ही थे जिन्होने सबसे पहले कारगिल युद्घ के बाद पाकिस्तान जा कर क्रिकेट खेलने से मना किया था ।
हमारी कामना हैं की ईश्वर ऐसे सचे इंसान और बनाता चले जो देश के लिये मर मिटना का जज्बा रखते हो और अपनी जिंदगी सही तरह से जीते हो । जो लोग भी " मिल सकता हैं " को केवल इस लिये ना ले क्युकी वो "ग़लत " हैं वही लोग इंसान कहलाने के हकदार होते हैं ।
गलत को रोकना मुश्किल हो सकता हैं पर गलत को ना करना बहुत आसन होता हैं और सचिन इस की मिसाल हैं ।
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