सच बोलना जितना मुश्किल है , सच को स्वीकारना उस से भी ज्यादा मुश्किल है . लेकिन सच ही शाश्वत है और रहेगा मुझे अपने सच पर उतना ही अभिमान है जितना किसी को अपने झूठ से होने वाले फायदे पर होता हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
October 19, 2009
सरकारी कर्मचारी , ब्लॉग , विज्ञापन और कमाई
जी हाँ अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं , यूनिवर्सिटी के अध्यापक हैं या किसी भी ऐसी संस्था मे काम करते हैं जहाँ आप को नौकरी देते समय "appointment letter " दिया गया हैं तो आप उस पत्र की सभी शर्तो को मानने के लिये बाध्य हैं ।
प्राइवेट नौकरी मे बहुधा थ्रू प्रोपर चैनल की बात नहीं होती हैं पर सरकारी और सरकारी कानूनों के आधीन सभी संस्थानों मे ये रुल हैं की आप कोई भी कार्य करने से पहले अपने बॉस या सुपीरियर से लिख कर आज्ञा लेगे ।
और अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप पर कार्यवाही की जा सकती हैं ।
इस पोस्ट से पहले की दो पोस्ट जरुर पढे ताकि सन्दर्भ पता हो
दिल्ली विश्विद्यालय मे भी ये कानून हैं और वहा तो आप अगर ट्यूशन भी करते हैं तो गैर कानूनी हैं अगर उस ट्यूशन के लिये आप कोई फीस लेते हैं ।
जो लोग ऑफिस के समय मे ब्लोगिंग कर रहे हैं और जिनके ब्लॉग पर adsense हैं अगर आप ध्यान से उनके ब्लॉग देखेगे तो सब मे पोस्टिंग का टाइम रात का ही सेट किया हुआ मिलेगा !!!!!! और बहुत से ऐसे भी हैं जो पोस्ट पब्लिश का समय दिखाते ही नहीं है
पर क्युकी बहुत से ब्लॉग अग्रीगाटर पर हैं तो सही टाइम वहां से मिलता हैं । इस लिये जरुरी हैं की स्नेप शोट अग्रीगाटर से लिया जाये न की ब्लॉग का ।
ये कहना बिल्कुल निराधार होगा की हमने पोस्ट schedule कर रखी थी क्युई आप ब्लॉग्गिंग ऑफिस से इतर भी कर सकते हैं लेकिन कोई भी विज्ञापन आप के ब्लॉग पर नहीं होना चाहिये ।
पैसा कैसे इंसान की नियत बदल सकता हैं हिन्दी ब्लॉग जगत के ब्लॉग ये बताते हैं । ५०% से ज्यादा हिन्दी ब्लॉगर सरकारी संस्थानों मे आज भी ऊँचे पदों पर हैं पर लालच हैं एक्स्ट्रा इन्काम का , हिन्दी के अलावा उनके इंग्लिश के ब्लॉग भी हैं । लेकिन वो दिन दूर नहीं हैं जब ये लालच महंगा पड़ जायेगा ।
आज इतने न्यूज़ चैनेल हैं , मीडिया कहानियों को / बेईमानियों को उजागर कर रहा हैं न जाने कब ख़बर आजाए फला फला संसथान मे सरकारी पैसे का दुरूपयोग हो रहा हैं और सरकारी अफसर / बाबू ब्लॉग लिख कर विज्ञापन लगा रहे हैं और पैसा कमा रहे हैं ।
पैसा मिले ना मिले इस विज्ञापन से / ब्लोगिंग से हाँ नौकरी की सीआर जरुर बिगड़ सकती हैं । या नहीं ???
नियम और कानून मानने के लिये ही बने होते हैं
और हाँ अगर ध्यान से समझे तो आप ये जान सकेगे की ऑफिस के समय मे अगर आप कहीं भी कोई भी पोस्ट पढ़ कर उस पर कमेन्ट करते हैं तो वो कमेन्ट भी "as proof " आप के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता हैं
October 18, 2009
क्या आपने अपने सुपीरियर को ये जानकारी दी हैं कि आप ब्लोगिंग करते हैं और आप के हर ब्लॉग पर विज्ञापन हैं जिनसे आप को आय होने की सम्भावना हैं ?
क्या सरकारी कर्मचारी को ये अधिकार हैं की वो गूगल एड सेंस से बिना अपनी कम्पनी को बताये कमाई कर सके ?
क्या हिन्दी ब्लॉगर जो सरकारी क्षेत्रो मे कार्य रत हैं और जिनके यहाँ " थ्रू प्रोपर चैनल " को प्रक्रिया लागू होती हैं वो इस प्रकार से एड दिखा कर नौकरी से सम्बंधित किसी कानून को तो नहीं तोड़ रहे हैं ।
प्रश्न ये नहीं हैं की आप की कोई कमायी इस प्रकार से गूगल एड सेंस या किसी भी प्रकार से ब्लॉग से हो रही हैं या नहीं ,
प्रश्न ये हैं की क्या अन्य जगह से पैसा कमाने के लिये आप कोशिश कर रहे हैं , इस बात के लिये आप ने " थ्रू प्रोपर चैनल " आज्ञा ली भी हैं या नहीं ।
क्या आपने अपने सुपीरियर को ये जानकारी दी हैं की आप ब्लोगिंग करते हैं और आप के हर ब्लॉग पर विज्ञापन हैं जिनसे आप को आय होने की सम्भावना हैं ? अगर नहीं दी हैं तो क्या आप सर्विस रूल बुक मे दिये गए नियम का उलंघन तो नहीं कर रहे हैं ??
क्या आप ने अनुमति ली हैं अपनी आय बढ़ने के लिये ???