बिना मठ के मठाधीश मेरे पसंदीदा
सुरेश चिपलूनकर
नीरज गोस्वामी
गौतम राजरिशी
कंचन चौहान
पंकज सुबीर
अजीत वाडनेकर
हरकीरत हकीर
मीनाक्षी धन्वन्तरी
ममता टी वी
विचार शून्य
हिमांशु पाण्डेय
मेरे पसंदीदा ब्लोगर जो अपने मन की लिखते हैं
सुरेश चिपलूनकर - गर्व से कहो हम हिन्दू हैं ब्लॉग जगत का सच्चा सिपाही
नीरज गोस्वाई - कविता उनकी जान हैं शब्दों के कारीगर
गौतम राजरिशी - मेरा सैनिक भाई , सदा सलामत रहो तुम
कंचन चौहान - हाँ तुम वैसी हो जैसा मैने सोचा था
पंकज सुबीर - ग़ज़ल गुरु के पद पर आसीन
अजीत वाडनेकर - शब्दों के शहंशाह
हरकीरत हकीर - कविता की मालकिन
मीनाक्षी धन्वन्तरी - प्रेम प्यासी गगरी की धरोहरण
ममता टी वी - संस्मरण यात्रा पर हमेशा
विचार शून्य - अगड़म बगड़म मे बहुत हैं दम
हिमांशु पाण्डेय - तुमको अपने घर की सब किताबे दे देने का करता रहा मन
दिस्क्लैमेर
पसंद की कोई सीढ़ी या पायदान नहीं होता हैं
सच बोलना जितना मुश्किल है , सच को स्वीकारना उस से भी ज्यादा मुश्किल है . लेकिन सच ही शाश्वत है और रहेगा मुझे अपने सच पर उतना ही अभिमान है जितना किसी को अपने झूठ से होने वाले फायदे पर होता हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
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July 01, 2011
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