मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

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April 29, 2009

कभी कभी

जिन्दगी
तेरी जुल्फों की घनी छाँव मे गुजरने पाती
तो शायद ब्लॉग्गिंग हो भी सकती थी
मगर ये हो ना सका और
अब ये आलम हैं
तू नहीं तेरी टिप्पणी भी नहीं
गुजर रही हैं ब्लोगिंग कुछ इस तरह
जैसे इसे किसी
अग्रीगेटर की जरुरत भी नहीं

6 comments:

  1. ओह्ह!! इत्ती मार्मिक रचना..आँखों से झर झर आँसू गिरने लगे.

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  2. बहुत मार्मिक और गहन रचना. भावों को बहुत उम्दा शब्द दिये हैं. शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  3. अब ऐसा कुछ किया जाए
    खुद ही बेनामी बन कर
    चटके और टिप्पणियों से से
    ब्लॉग सजाया जाए

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  4. क्या लिखा है आपने
    वाह वाह

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