ब्लागस्पाट.कॉम अब ब्लागस्पाट.इन नज़र आ रहा हैं । क्या फायदा हैं और क्या नुक्सान तकनीक के जानकार कुछ इस पर राय दे । काफी दिन से गूगल डोमेन .इन पर फ्री वेबसाइट देने की बात कह रहा था , रजिस्टर करने के बाद भी कुछ नहीं हुआ । लोग इन नहीं होता । आज अपने ब्लॉग का .कॉम जब .इन दिखा तो सोचा लगता हैं फ्री का ज़माना ख़तम हो रहा हैं ।
सरकार गूगल की फ्रीडम ख़तम करने की बात कर रही हैं तो गूगल जी कॉम से इन कर दिये ब्लागस्पाट को ।
सच बोलना जितना मुश्किल है , सच को स्वीकारना उस से भी ज्यादा मुश्किल है . लेकिन सच ही शाश्वत है और रहेगा मुझे अपने सच पर उतना ही अभिमान है जितना किसी को अपने झूठ से होने वाले फायदे पर होता हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
February 01, 2012
January 05, 2012
क्या आप को लगता हैं अब शाकाहारी खाने के शौक़ीन ज्यादा बाहर जा कर खाना पसंद करेगे ?
क्या आप जानते हैं की भारतीये होटल अब वेजिटेरियन खाने को ज्यादा अहमियत देने वाले हैं । कारण बड़ा सीधा हैं एक सर्वे ने बताया हैं की जिन लोगो के पास ज्यादा पैसा हैं यानि खरीदने की ज्यादा ताकत हैं वो सब ज्यादातर वेजिटेरियन हैं और उन में से बहुत से ऐसे हैं जो होटल में केवल इस लिये खाना नहीं खाते हैं क्युकी वहाँ नॉन वेजिटेरियन खाना भी बनता हैं । अब बहुत से होटलों ने केवल वेजिटेरियन खाना बनाने और बेचने की सोची हैं ।कुछ होटल अपने यहाँ अलग से शाकाहारी खाने का काउंटर भी लगाने की सोच रहे हैं ।
क्या आप को लगता हैं अब शाकाहारी खाने के शौक़ीन ज्यादा बाहर जा कर खाना पसंद करेगे ?
शाकाहारी खाना सेहत के लिये फायदेमंद हैं ये सब जानते हैं । मेरा मानना हैं खाना अपनी पसंद का ही खाना चाहिये लेकिन नॉन वेज खाने के साथ जुड़ी जीव ह्त्या मुझे उस खाने को खाने से हमेशा रोकती हैं ।
लोग वेज नॉन वेज को हिन्दू मुस्लिम से जोड़ कर एक दूसरे पर तोहमत लगाते हैं , विज्ञान खाने के लिये जीव ह्त्या को कभी सही तो कभी गलत मानता हैं , गलत तब जब जिसको मारा जा रहा हैं वो प्रजाति विलुप्त हो रही हो ।
आज कल दिल्ली में गिलहरी का meat खाने के शौक़ीन भी पाए जा रहे हैं । सोच कर भी मन व्यथित होता हैं जब इस प्रकार से जीव ह्त्या होती हैं ।
जो लोग विदेशो में जा कर बर्गर , हॉट डॉग इत्यादि बड़े शौक से खाते हैं अगर कभी ध्यान दे तो पायेगे वो सब गाय के मॉस से ही बनते हैं । खाने से पहले एक बार काउंटर पर पूछ ले तो आप को भ्रम नहीं रहेगा ।
नॉन वेज खाने वाले मानते हैं नॉन वेज नॉन वेज होता हैं किसी भी जीव का हो क़ोई फरक नहीं पड़ता हैं ।
जापान में शायद ही क़ोई सलाद हो जिसमे मछली ना पड़ती हो , वहाँ मछली वेज मानी जाति हैं । बंगकोक में बीफ को वेज मानते हैं और वेज बर्गर मांगने पर मेक्डोनाल्ड ने मुझ बीफ बर्गर दिया था पर वहाँ की मेनेजर ने मुझे खाने से रोका था और कहा था की आप भारतीये हैं ये आप ना खाये ।
आज के लिये इतना ही
क्या आप को लगता हैं अब शाकाहारी खाने के शौक़ीन ज्यादा बाहर जा कर खाना पसंद करेगे ?
शाकाहारी खाना सेहत के लिये फायदेमंद हैं ये सब जानते हैं । मेरा मानना हैं खाना अपनी पसंद का ही खाना चाहिये लेकिन नॉन वेज खाने के साथ जुड़ी जीव ह्त्या मुझे उस खाने को खाने से हमेशा रोकती हैं ।
लोग वेज नॉन वेज को हिन्दू मुस्लिम से जोड़ कर एक दूसरे पर तोहमत लगाते हैं , विज्ञान खाने के लिये जीव ह्त्या को कभी सही तो कभी गलत मानता हैं , गलत तब जब जिसको मारा जा रहा हैं वो प्रजाति विलुप्त हो रही हो ।
आज कल दिल्ली में गिलहरी का meat खाने के शौक़ीन भी पाए जा रहे हैं । सोच कर भी मन व्यथित होता हैं जब इस प्रकार से जीव ह्त्या होती हैं ।
जो लोग विदेशो में जा कर बर्गर , हॉट डॉग इत्यादि बड़े शौक से खाते हैं अगर कभी ध्यान दे तो पायेगे वो सब गाय के मॉस से ही बनते हैं । खाने से पहले एक बार काउंटर पर पूछ ले तो आप को भ्रम नहीं रहेगा ।
नॉन वेज खाने वाले मानते हैं नॉन वेज नॉन वेज होता हैं किसी भी जीव का हो क़ोई फरक नहीं पड़ता हैं ।
जापान में शायद ही क़ोई सलाद हो जिसमे मछली ना पड़ती हो , वहाँ मछली वेज मानी जाति हैं । बंगकोक में बीफ को वेज मानते हैं और वेज बर्गर मांगने पर मेक्डोनाल्ड ने मुझ बीफ बर्गर दिया था पर वहाँ की मेनेजर ने मुझे खाने से रोका था और कहा था की आप भारतीये हैं ये आप ना खाये ।
आज के लिये इतना ही
December 31, 2011
मेरा कमेन्ट
आप की एक अभिन्न ब्लॉग मित्र हैं जो आज कल ब्लॉग लेखन में उतना सक्रिय नहीं हैं उनकी एक पोस्ट आयी थी
जिस पर मैने कमेन्ट दिया था जो मैने अपने ब्लॉग पर सहेज दिया हैं क्युकी उनकी पोस्ट पर कमेन्ट दिखने बंद है .
here is the link
http://mypoeticresponse.blogspot.com/2010/10/blog-post_26.html
उस पोस्ट पर
here is the link
http://swapnamanjusha.blogspot.com/2010/10/blog-post_26.html#comment-form
आप की क़ोई आपत्ति नहीं याद पड़ती ????? ना ही मेरे कमेन्ट की तारीफ में आप का क़ोई कमेन्ट .
ख़ैर आते हैं अन्ना की बात पर और ब्लॉग जगत की "नारी " की चुप्पी पर कारण सहज हैं ये वक्तव्य एक पुरुष का हैं और सारे पुरुष जैसे राज भाटिया एक स्वर में इसके समर्थन में खड़े हैं और रहेगे जैसे उस पोस्ट पर थे जो आप की मित्र की थी , वो महिला हो कर ये सब कह सकती थी और इस ब्लॉग जगत में समर्थन भी पा सकती थी . तारीफ़ भी और नारी ब्लॉग पर अगर सही भी लिख दिया जाये तो मुझे आप जैसे सहज ब्लॉगर भी "विघ्नसंतोषी" की उपाधि से नवाजते हैं .
here is the link
http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2010/11/blog-post_9611.html?showComment=1290494506029#c4501753229830411178
आज के अखबार में एक और खबर हैं ऐसी ही एक पुलिस अधिकारी ने कहा हैं की महिला के कपड़े रेप का कारण हैं और चिदम्बरम ने तुरंत उस ब्यान को ख़ारिज किया हैं , वो भी चाहते हो इंतज़ार कर सकते थे की कब महिला आयोग जागेगा .
पुरुष की गलत ब्यान बाज़ी के खिलाफ पोस्ट लिखी नहीं की "नारी " पुरुष विरोधी हो गयी . अभी ३ कमेन्ट हैं और २ आप के विचारो के खिलाफ हैं जो की "पुरुष" के कमेन्ट हैं , वो "पुरुष " जो अन्ना में भी सहज रूप से बैठा हैं .
इन सब बेहूदी बातो का विरोध नारी ब्लॉग पर बंद हो गया हैं क्युकी नारी ब्लॉग पर मोरल पुलिसिंग बंद कर दी वो मोरल पुलिसिंग जो सदियों से पुरुष नारी की करता हैं
आप ने माना की ब्लॉग जगत की "नारी " का विरोध सही होता हैं इसके लिये थैंक्स , हाँ कह सकते हैं देर आये दुरुस्त आये ।
मेरा कमेन्ट
जिस पर मैने कमेन्ट दिया था जो मैने अपने ब्लॉग पर सहेज दिया हैं क्युकी उनकी पोस्ट पर कमेन्ट दिखने बंद है .
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http://mypoeticresponse.blogspot.com/2010/10/blog-post_26.html
उस पोस्ट पर
here is the link
http://swapnamanjusha.blogspot.com/2010/10/blog-post_26.html#comment-form
आप की क़ोई आपत्ति नहीं याद पड़ती ????? ना ही मेरे कमेन्ट की तारीफ में आप का क़ोई कमेन्ट .
ख़ैर आते हैं अन्ना की बात पर और ब्लॉग जगत की "नारी " की चुप्पी पर कारण सहज हैं ये वक्तव्य एक पुरुष का हैं और सारे पुरुष जैसे राज भाटिया एक स्वर में इसके समर्थन में खड़े हैं और रहेगे जैसे उस पोस्ट पर थे जो आप की मित्र की थी , वो महिला हो कर ये सब कह सकती थी और इस ब्लॉग जगत में समर्थन भी पा सकती थी . तारीफ़ भी और नारी ब्लॉग पर अगर सही भी लिख दिया जाये तो मुझे आप जैसे सहज ब्लॉगर भी "विघ्नसंतोषी" की उपाधि से नवाजते हैं .
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http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2010/11/blog-post_9611.html?showComment=1290494506029#c4501753229830411178
आज के अखबार में एक और खबर हैं ऐसी ही एक पुलिस अधिकारी ने कहा हैं की महिला के कपड़े रेप का कारण हैं और चिदम्बरम ने तुरंत उस ब्यान को ख़ारिज किया हैं , वो भी चाहते हो इंतज़ार कर सकते थे की कब महिला आयोग जागेगा .
पुरुष की गलत ब्यान बाज़ी के खिलाफ पोस्ट लिखी नहीं की "नारी " पुरुष विरोधी हो गयी . अभी ३ कमेन्ट हैं और २ आप के विचारो के खिलाफ हैं जो की "पुरुष" के कमेन्ट हैं , वो "पुरुष " जो अन्ना में भी सहज रूप से बैठा हैं .
इन सब बेहूदी बातो का विरोध नारी ब्लॉग पर बंद हो गया हैं क्युकी नारी ब्लॉग पर मोरल पुलिसिंग बंद कर दी वो मोरल पुलिसिंग जो सदियों से पुरुष नारी की करता हैं
आप ने माना की ब्लॉग जगत की "नारी " का विरोध सही होता हैं इसके लिये थैंक्स , हाँ कह सकते हैं देर आये दुरुस्त आये ।
मेरा कमेन्ट
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नारी
December 27, 2011
हिंदी ब्लोगिंग की पहचान
हिंदी ब्लोगिंग की पहचान अब तक केवल और केवल हिंदी साहित्य की शाखा के रूप में हो पाई हैं । हर मीटिंग , मेल जोल ब्लॉगर मिलन , खान पान , दोस्ती , भाईचारा , बहनापे और कविता पाठ , किताब विमोचन गीत ग़ज़ल और पीना पिलाना तक ही सिमित हुआ हैं ।
वो ब्लॉगर भी जो मुद्दों से जुड़ कर ब्लॉग पर लिखते इन मीटिंग में केवल और केवल मनोरंजन की चाह और मेल जोल के लिये ही जाते हैं
ना जाने कितने ब्लॉग पर पिछले एक महीने या दो महीने में ब्लोगिंग , टिपण्णी , पाठक , कंटेंट , और भी ना जाने कितने विषयों पर पोस्ट आयी हैं पर साल के अंत में बात वही की वही हैं
सक्रियता से वही मिल जुल रहे हैं जो साहित्यकार बनना चाहते हैं , कवि कहलाना चाहते हैं ।
सिमित दायरा हो गया हैं हिंदी ब्लोगिंग का या सिमट गयी हैं हिंदी ब्लोगिंग
पता नहीं पर ब्लोगिंग का जो स्वरुप हैं या जिस स्वरुप की कल्पना कर के या जिस स्वरुप की खोज में हिंदी ब्लॉग लिखना शुरू किया था वो स्वरुप कही नहीं हैं
सभी को आने वाले वर्ष की बधाई
वो ब्लॉगर भी जो मुद्दों से जुड़ कर ब्लॉग पर लिखते इन मीटिंग में केवल और केवल मनोरंजन की चाह और मेल जोल के लिये ही जाते हैं
ना जाने कितने ब्लॉग पर पिछले एक महीने या दो महीने में ब्लोगिंग , टिपण्णी , पाठक , कंटेंट , और भी ना जाने कितने विषयों पर पोस्ट आयी हैं पर साल के अंत में बात वही की वही हैं
सक्रियता से वही मिल जुल रहे हैं जो साहित्यकार बनना चाहते हैं , कवि कहलाना चाहते हैं ।
सिमित दायरा हो गया हैं हिंदी ब्लोगिंग का या सिमट गयी हैं हिंदी ब्लोगिंग
पता नहीं पर ब्लोगिंग का जो स्वरुप हैं या जिस स्वरुप की कल्पना कर के या जिस स्वरुप की खोज में हिंदी ब्लॉग लिखना शुरू किया था वो स्वरुप कही नहीं हैं
सभी को आने वाले वर्ष की बधाई
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