जो लोग चिटठा जगत के सक्रियता क्रम को नहीं समझ पाते हैं और उनको बता दूँ कि अगर इसमे ऊपर आना हैं तो अपने मित्रो को कहे कि वो आप के ब्लॉग को अपनी किसी पोस्ट मे जोड़े , जितनी पोस्ट मे आप का ब्लॉग जुड़ता जायेगा उतना ऊपर आता जाएगा ।
जब चिटठा जगत बना था उस समय जो सक्रिय ब्लॉग थे वो अगर आज एक महीने बाद भी अपने ब्लॉग पर पोस्ट देते हैं तो अपने ओरीजिनल संख्या पर वापस आ जाते हैं क्युकी उनके ब्लॉग का उल्लेख बहुत ब्लॉग मे हुआ हैं ।
सक्रियता केवल लिखना नहीं हैं आप को कितना पढ़ा जाता हैं और कितने लोगो ने आप का ब्लॉग पुस्तक चिन्ह किया हैं इस पर भी निर्भर हैं
इस पोस्ट पर मुझ कमेन्ट नहीं चाहिये आप ने पढ़ लिया शुक्रिया
वो कहते हैं ना " जे न मित्र दुःख होई दुखारी " सो अपने अपने मित्र ब्लॉगर को जोडीये और उनके दुःख को समझिये सक्रियता क्रम मे उनका नाम ऊपर आये इस लिये उनके ब्लॉग का जिक्र करिये ।
लिंकिंग कीजिये खुश रहिये जो चर्चा करते हैं अलग अलग ब्लॉग पर उनसे कहिये आप के ब्लॉग का लिंक भी दे । फिर देखिये ये सक्रियता क्रम कैसे डोलता हैं
सच बोलना जितना मुश्किल है , सच को स्वीकारना उस से भी ज्यादा मुश्किल है . लेकिन सच ही शाश्वत है और रहेगा मुझे अपने सच पर उतना ही अभिमान है जितना किसी को अपने झूठ से होने वाले फायदे पर होता हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं
December 05, 2010
December 04, 2010
जो लोग चिटठा जगत पर अपनी पोस्ट क्रम "धड़ाधड़ टिप्पणियां" मे ऊपर देखना चाहते हैं उनके लिये आसान और सरल उपाय
जो लोग चिटठा जगत पर अपनी पोस्ट क्रम "धड़ाधड़ टिप्पणियां" मे ऊपर देखना चाहते हैं उनके लिये आसान और सरल उपाय
पोस्ट पुब्लिश करे
चिटठा जगत पर जब दिखने लगे तो अपने नाम से कम से कम १५ कमेन्ट कर दे
फिर ५ मिनट रुके और सारे कमेन्ट "स्पाम" के फोल्डर मे डाल दे
यानी कमेन्ट डिलीट भी नहीं हुआ और दिखा भी नहीं और आप कि पोस्ट "धड़ाधड़ टिप्पणियां" मे १५ कमेन्ट दिखा देगी
कर के देखिये और बताइये नहीं यहाँ नहीं क्युकी हमको इस पोस्ट पर कमेन्ट कि चाह नहीं हैं हमने तो मात्र ब्लॉगर सेवा हित ये बात कही हैं
December 02, 2010
पिद्दी न पिद्दी का शोरबा
कल मुंबई में अभिजात सावंत कि पिटाई कर दी जनता ने कारण एक एक्सिडेंट मे उनकी दोस्त प्राजक्ता शुक्रे कि गाडी ने दो लोगो को घायल किया । सावंत और शुक्रे रेस लगा रहे थे ।
अभिजीत सावंत ने बीच बचाव करते हुए कहा " मेरे बहुत कोंटेक्ट हैं "
कल तक जो अभिजात सावंत ती वी पर वोते के लिये याचन कर रहे थे आज उनके भी "कोंटेक्ट" बन गए हैं वाह
इसे ही कहते हैं पिद्दी न पिद्दी का शोरबा
Labels:
अभिजीत सावंत
December 01, 2010
दम लगा के हईशा हिंदी ब्लोगिंग को ऊपर उठाना हैं

हिंदी ब्लोगिंग को ऊपर उठाना हैं , सन २०१० मे ये नारा हिंदी ब्लॉग मे तकरीबन किसी ना किसी ब्लॉग पर हर दिन किसी एक पोस्ट मे जरुर दिख ही गया ।
बहुत बार पढ़ा सोचा आज पूछ ही लूँ ऊपर उठाने से तात्पर्य क्या हैं ?? साल ख़तम होने को हैं
एक साधारण प्रश्न हैं , ना इसमे कोई व्यंग हैं ना तंज महज एक जिज्ञासा
कि
हिंदी ब्लोगिंग को ऊपर उठाना हैं का टार्गेट क्या हैं ???
सो निवेदन हैं कि कमेन्ट मे कुछ सार्थक रौशनी दी जाए इस विषय मे
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