मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

June 13, 2010

बड़ी अजनबी लगती हैं ये दुनिया

जन्माष्टमी पर
मंदिरों के अन्दर लम्बी लाइने
बाल गोपाल को झुला झुलाने के लिए


मन्दिर के बाहर लम्बी लाइने
मेले कुचले कपड़ो मे
प्रसाद मांगते बाल गोपाल


जन्माष्टमी पर
मन्दिर के अन्दर
कृष्ण के साथ परस्त्री को पूजती सुहागिने


मन्दिर के बाहर हाथ मे हाथ डाल कर घुमते
नौजवान अविवाहित जोडे पर टंच कसती सुहागिने


१५ अगस्त पर
आज़ादी के जश्न को मानते परिवार
नौकरानी के देर से आने पर आहत


बड़ी अजनबी लगती हैं ये दुनिया

6 comments:

  1. विरोधाभासों की मारक अभिव्यक्ति करती एक सशक्त रचना। प्रभावित करने का सामर्थ्य रखती है।

    शुक्रिया।

    ReplyDelete
  2. rachnaji
    hmare man ke bhavo ko bhi abhivykti de di hai kuchh aisa hi lga ye rachna padhkar.

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी रचना..पर अब तो मंदिर भी आंतक के साए में है!कुछ समय पहले तक यही सब मॉहोल था पर अब ...नजर लग गयी है किसी की...

    ReplyDelete
  4. शानदार पोस्ट है...

    ReplyDelete
  5. @-बड़ी अजनबी लगती हैं ये दुनिया

    Sahi farmaya !

    Fir bhi na jane kyun , jiye ja rahe hain hum log..

    Divya

    ReplyDelete

Blog Archive