मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

March 21, 2009

व्हाट अन आईडिया सर जी

सांझा ब्लॉग पर एक पोस्ट आयी
पोस्ट मे एक टिप्पणी आयी
टिप्पणी मे अपशब्द आये
जो लावण्या को नहीं भाये
अपने लिये होते तो भूल भी जाती
माँ के लिये थे तो भूल ना पायी
तुंरत लावण्या ने एक पोस्ट बनाई
सांझे नहीं निज ब्लॉग पर लगाई
अपनी माँ के प्रति दिये अपशब्दों
पर आपत्ति जतायी
निज का ब्लॉग था , अपनी माँ थी
आपत्ति भी अपनी थी
पर मसिजीवी को नहीं भायी
सो आदत के अनुसार
तुंरत उन्होने एक पोस्ट बनाई
अपने निज के ब्लॉग पर लगाई
और मास्टरों के अंदाज मे
लावण्या को वो समझाया
जो टिप्पणी मे मसिजीवी , ही को समझ आया
ख़ुद को मसिजीवी ने पोलीमिक्स ब्लॉगर
और निलोफर को आउट ऑफ़ बॉक्स ब्लॉगर बताया

कुछ महीने पहले
मोहल्ले पर भी एक टिप्पणी आयी थी
मसिजीवी की पत्नी के खिलाफ वहाँ थे अपशब्द
और तुरत फुरत मसिजीवी ने पोस्ट बनायी थी
अपनी आपत्ति जतायी थी और कहा था कि
मेरा ब्लॉग मोहल्ला नहीं हैं निज का ब्लॉग हैं
निज का दर्द हैं ।

जब मसिजीवी को दर्द हुआ तो निज का दर्द था
ब्लॉग पर झलका क्युकी निज का ब्लॉग था
और जब लावण्या को दर्द हुआ
तो वो समाज का पतन था
उसको निज के ब्लॉग पर डालना अज्ञान था

ये कहा की रीति हैं कि
मसिजीवी लिखे तो
निज का दर्द हैं ,
लावण्या लिखे
तो औसत ब्लॉगर की समस्या हैं

और
ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ हैं
जब मसिजीवी ने स्याही से दूसरो की
निज को काला किया हैं
इस बौछार ने हमे भी भिगोया हैं

हेडिंग मे नाम देने की प्रथा को
हमेशा सबसे ज्यादा मसिजीवी ने भुनाया हैं
और ब्लॉग जगत मे विष भी
सबसे ज्यादा मसिजीवी ने ही फैलाया हैं
इस टिप्पणी प्रति टिप्पणी ने
तो यही बतलाया हैं

तुम्हारी पत्नी का अपमान
अपमान
दूसरे की माँ का अपमान
अज्ञान
हम इंग्लिश के लिये कुछ कहे तो क्यूँ ??
आप इंग्लिश का ब्लॉग लिखो
तो पापी पेट का सवाल हैं

व्हाट अन आईडिया सर जी



सबका निज अपना होता हैं
सबका दर्द भी अपना होता हैं
दर्द ना बाँट सको तो मत बांटो
पीड़ा तो और ना दो

15 comments:

  1. अरे नहीं ये तो खूब याद किया
    आपने याद किया तो मैंने भी याद किया

    तब था शायद अविनाश
    उसने कहा था नीलीमा जी को माता जी
    तो जी हो गया हंगामा जी

    पिच के एक एन्ड पे मसिजीवी
    और दूसरे एन्ड पे नीलीमा जी
    दोनों ने मिल के छक्के चौके उडा दिये
    अविनाश का मिचला गया जी

    सही बात ढूढी है आपने
    माताजी है बेज्जिती
    और जातीसूचक गाली है इज्जती
    मसिजीवी जी वाह जी वाह जी

    देखे आपके रंग जी
    देखे आपके ढंग जी
    वाह जी
    वाह जी

    लिखते रहिये शाह जी

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  2. किसी का दिल ना दुखे
    ऐसा ही बोलो, लिखो या कहो
    मेरा तो यही मत है -
    किसी से सँवाद तथी स्थापित
    होता है
    जब आप अपना विरोध भी,
    सँयम बरत कर करेँ
    " एक तरीका होता है "
    - जैसे अनूप शुक्ला जी ने भी कहा
    आशा है,
    लोग इस पर ध्यान देँगेँ ..
    - लावण्या

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  3. bahut khoob
    sabki bakhiya udhed di...

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  4. बहूत खूब !
    लेकिन बहनजी, ये ना भूले कि
    बदनाम होगा तो क्या नाम न होगा!
    लगता है आपके दिल, दिमाग और सोच (अगर है तो) सिर्फ और सिर्फ मसिजीवी ही छाए हूए हैं। मसिजीवी का इतना गुन गान करने से तो बेहतर है कि आप उनसे यह सीखे की किसी एक व्यक्ति के ऊपर एक पोस्ट बरबाद करने की बजाये कोई विचारोत्तेजक पोसट लिखे जो कि आपने शायद बहूत अरसे नही लिखी

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  5. दर्द सबको अपना ही महसूस होता है

    दूसरे का दर्द दर्द कहां होता है जी।

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  6. औउसत पाठकMarch 22, 2009 at 4:14 PM

    मसिजीवी कोई औउसत पाठक नक्को जी. उने...औउसत पाठक ब्लॉगर भी नक्को. ईसे में वो जो भी लिक्खेंगे मियां, वो भी औउसत नक्को होगा न....मालूम या नहीं...मसिजीवी ने तोताचान पढ़ रक्खी है....और वो नीलोफर ने भी तोताचान पढ़ रक्खी है मियां...कितना बड़ा को-इन्सिडेन्स है...या खुदा...आउट ऑफ़ बॉक्स ब्लॉगर लोग से क्या-क्या लिखवाता है तू?

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  7. लिंक्स बड़े शानदार दिये हैं पोस्ट पढ़ कर मजा आया

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  8. मेरा मानना है कि किसी का सार्वजनिक तौर पर विरोध करने का मतलब है कि उस को बढ़ावा देना यदि आप उसका विरोध बिना प्रचार के करे तो अच्छा रहता है । क्यों कि वह व्यक्ति बिना कुछ किये ही प्रसिद्धि पा जाता है ।

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  9. मुझे तो पोस्ट पढ़कर बहुत आनन्द आया। आखिर अपने विचारों को व्यक्त करने का सबको अधिकार है।

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  10. fine. good. exe. I am not part of this.....

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  11. मुझे जितनी अपनी इज्जत की फ़िक्र है उतनी ही सामने वाले की इज्जत की भी, क्योकि अगर इज्जत करवानी है तो इज्जत करना सीखॊ...
    आप की कविता शिकायत के रुप मै बहुत अच्छी लगी, ओर इ कविता मै शिकायात भी उचित है, मां तो सब की एक समान है जिस ने भी लावण्या जी की मां की बेज्जती कि उस ने अपनी मां हम सब की मां की बेज्जती की है, यहां हम सब एक दुसरे को भी सभ्या हो कर शिकायत करे, यही उचित है, ओर एक दुसरे की बात सहनी सीखॆ.
    धन्यवाद

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  12. व्हाट अन आईडिया सर जी

    सरजी को कोई फरक नहीं पड़ता हिंदी ब्लोगिंग मे वो जब से लिख रहे हैं यही होता हैं ना जाने कितने ब्लॉग हैं उनके

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  13. What he is? uxorious or henpecked? or just acting foolish?

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  14. आपने अच्छा और करारा जवाब लिखा है । यदि आपकी इस पोस्ट का पता होता तो इसका संदर्भ भी देती। मसिजीवी ने अपनी भूल के लिए चलते-चलाते खेद प्रकट किया है। अपना घर पर देख लें। उम्मीद करती हूँ कि लावन्या जी ने उन्हे माफ कर देंगी।

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