मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

मेरे ब्लॉग के किसी भी लेख को कहीं भी इस्तमाल करने से पहले मुझ से पूछना जरुरी हैं

April 25, 2009

आप को ब्लॉगर से साहित्यकार बना दिया गया हैं -- तालियाँ .......

आप ब्लॉग लिखते हैं पर खुश तब होते हैं जब कोई आप को साहित्यकार कह देता हैं ।

क्या ब्लॉग लेखन करना एक कमतर कार्य हैं और ब्लॉगर कहलाने से बेहतर हैं साहित्यकार कहलाना ??

अगर आप को ब्लॉग लेखन से प्रसिद्दि मिल रही हैं तो आप को तुष्टि साहित्यकार कह लाने से ही क्यों मिलती हैं ??




आप बडे हैं , आप बेहतर हिन्दी के ज्ञाता हैं ये किसी को आप कैसे बता सकते हैं या आप साहित्यकार हैं और ब्लॉगर से ऊँचे पायदान पर खडे हैं , इस बात को कैसे स्थापित कर सकते हैं ?

बहुत आसान हैं ,
किसी की भी पोस्ट मे या कमेन्ट मे वर्तनी की त्रुटियां खोज ले और उसकी पोस्ट के नीचे लिख दे , लीजिये आप का वर्चस्व स्थापित होगया । तालियाँ .......

39 comments:

  1. तालियाँ ...हमने भी बजाई जी :-)

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  2. लिखा जो नुस्खा आपने होगा बहुत प्रभाव।
    ठीक वर्तनी संग में रचना में हो भाव।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  3. आसन को आसान लिखतीं तो अच्छा होता.
    :-)
    अब तो हम बड़े बने कि नहीं? आपकी पोस्ट में कमी खोज दी न :-)

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  4. roshan

    aap saahitaykaar ban gayae badhaaii aur taaliyaan

    aasaan ko aasaan sahii kar diya blogger banii rahee

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  5. आप गवाह हैं कि हम बड़े साहित्यकार हैं भूलियेगा नहीं :-)

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  6. अपनी समझ से तो " आसन " ही बेहतर था . try reading again. It'll give u an expression----'there are many crooked ways' .

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  7. roshan
    jab bhi maeri gavhi ki jarurat ho bataa daena

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  8. rachana ji hum to blogger hi reh gaye na:):),sahityakaar kab banege:):)aaj tak 200 se jyada kavita dheli hai:):)ha ha kaunu certificate hamka bhi de do ji:)

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  9. et tu brute?

    अब सभी बनेगे बड़े :-)

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  10. हम तो ब्लागर ही भले।

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  11. हम तो ब्लागर ही भले।

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  12. एक बार और कह दीजिए अनिल जी तीन बार कहने पर भरोसा हो जायेगा कि आप ब्लोगर ही भले हैं

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  13. haan anil ji roshan ko dar lag rahaa haen ki kahin saahitykaaro ki bheed mae wo beechara kho naa jyae

    aur mehak certificate ban rahaa haen
    jaldi yahii blog par hogaa
    aap down losd kar laena

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  14. किसी की गलतियां निकालने से कोई साहित्यकार नहीं हो जाता है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि ब्लाग में लिखना इसलिए कठिन है क्योंकि इसमें रोमन में लिखना पड़ता है। रोमन में कई शब्द बनते ही नहीं है या फिर लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। यूनीकोड का की-बोर्ड हमारी जानकारी में काफी कम लोग जानते हैं। हमारे साथ एक अच्छी बात यह है कि हम चाणक्य में लिखते हैं और उनको यूनीकोड में बदल देते हैं। ऐसे में गलतियों का सवाल ही नहीं। ध्यान गलतियों पर नहीं लिखने वाले की भावनाओं पर देना चाहिए। गलतियां तो सब करते हैं। कोई इस बात का दावा ही नहीं कर सकता है कि उससे गलती नहीं होती। कई बार अनचाही गलतियां भी हो जाती हैं। वैसे यह बात समङो से परे है कि ब्लागर और साहित्यार को लेकर आखिर बवाल क्यों मचाया जा रहा है। जो जिसको चाहे ब्लागर समङो जो जिसको चाहे साहित्यकार समङो। अगर मुङो किसी को पुरस्कार देना है तो मैं तो उसी को दंूगा जिसके बारे में बहुमत होगा या फिर उसको दूंगा जिसको मेरा देने का मन होगा। वैसे भी अपने देश में मिलने वाले सम्मान किस तरह से मिलते हैं यह बताने की जरूरत नहीं है। ज्यादातर सम्मान मिलते नहीं बल्कि उनका जुगाड़ किया जाता है। अब जिसमें जितनी क्षमता होती है वह उतने सम्मान जुगाड़ लेता है और एक वह भी होता है जो वास्तव में सम्मान के लायक रहता है, पर उसको लायक ही नहीं माना जाता है। क्या किसी ने कभी ऐसे लोगों के दिलों में ङाांककर देखा है कि उनके दिलों पर क्या बीतती है।

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  15. "आप ब्लॉग लिखते हैं पर खुश तब होते हैं जब कोई आप को साहित्यकार कह देता हैं ।"

    यह धारणा कैसे निर्मित हो गयी ? यहाँ तो बहुत से ब्लॉगर हिन्दी साहित्य की बेहतरी के लिये प्रकारांतर से जी जान लगा कर लगे पड़े हैं, पर खालिस ब्लॉगर बन कर । यह भी तो देखिये कि हिन्दी के साहित्यकार भी अब ब्लॉगिंग कर रहे हैं, ब्लॉगिंग के गुण गा रहे हैं । सुयश तो ब्लॉगर कहलाने में ही है ।

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  16. himanshu
    drishti kaa vistaar karey kuch blog par idhar udar jhaankae bahut kuch milaega isधारणा kae baarey mae

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  17. अब अगर बोलने का है कि कुछ भी नहीं तो ऐसे कैसे काम चलेगा। एक खानी तो पड़ना ही पड़ेगा नई तो सबकी बैण्‍ड बज जाएगी। भले ई बात कित्‍ती समझा दो वर्तनी सई नई होगी तो बात का ई कचरा हो जाएंगा। ऐसा करने से हिन्‍दी की ऐसी तैसी तो होणी है भावों का भी सतानाश होगा। ऐसा नई है कि सब लोग ऐसा ही सोचत हैं लेकिन सोचने के लिए सोचना जरूरी हैं कि साहित्‍यवाला बनने से बढिया हैं कि बढिया लिखणवाला क्‍यों बन बना लिया जाए । ऐसे तो काम कैसे चलेगा कि ऊटपटांग में कुछ भी लिखा दे मारें तो कुछ समझ में आएगा तो कुछ कचरा हो जाएगा।




    शायद इस वजह से वर्तनी और संबंधी शुद्धियों का आग्रह किया जाता होगा। :)

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  18. एक और शुद्धि
    वर्तनी और भाषा संबंधी शुद्धियों का आग्रह किया जाता होगा। :)

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  19. तालियां बजाली हमने भी.:) हम तो ढंग के ब्लागर भी बन जायें तो बहुत बडी बात होगी.

    साहित्यकार का हमारा नम्बर इस जन्म मे तो आने वाला नही है.:)

    रामराम.

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  20. रचना जी आपके पचीसवें लाईन के बांये अंतरे में वर्तनी ठीक कर लिजिये। अनिल जी, जरा अपने नाम में नील पर जोर ज्यादा दिजिये। रौशन जी, आप र शब्द जरा गुर्रा कर बोला किजिये....ताउ जी आप उ पर टेढे पू की मात्रा लगा दिजिये :)

    अब इतनी गलतियां निकाल दिया है मुझे साहित्यकार वाला मैडल दिया जाय.......अरे वो क्या है ताउ के हाथ में - अरेरे ये तो कोई जूता है। माफ किजिये ताउ..... इसका माप मेरे पैर से नहीं मिलता....पहले मेरे पैरों का माप ले लिजिये तब जूता फेकिये और ऐसा फेकिये की मैं कैच कर सकूं.....औऱ हाँ मीडीया वालों को जरूर बुला देना ताकि खबर बने....एक साहित्यकार पर जूता फेंका गया :)


    Just Kidding :)

    रचना जी, ये ब्लॉगजगत में आजकल की नई खुशफहमी है कि बलॉगर कहाउं या साहित्यकार ।
    मुझे तो लगता है इन दोनों शब्दों से अच्छा है कि कहा जाय - टाईम खोटीकार :)

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  21. BAHUT SAHI...

    HUM BLOGGERS KA DIL JEET LIYA...

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  22. HIMANSHU JI KI TIPPANI BHI PASAND AAIE...

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  23. rampuriya ji bhi aaj aagaey taali bajaane , aho bhagya is blog kae

    mae aap ko tau nahin kehsaktee kyuki uttar bharat mae tau pita kae badae bhai ko hi kehaa jaata haen aur us umr seema ko aap ne nahin chua haen
    so raampuria ji sae hi kaam chalega mera to

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  24. satish pancham ji
    aap ko jaldi hi medal milaega abhi to sirf badaey blogger sahitykaar banaaye jaa rahey haen

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  25. timekhoteekar is the appropriate word..i think...

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  26. taliyan...... :)
    ham to blogger ban kar khush hain..
    hame na to buddhijivi banna hai aur na hi sahitykar... kabhi sahitykar banne ka bhoot chadha bhi to angreji me banege, kuchh dhang ki kamayi to hogi.... :D

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  27. सतीश जी गुर्राना किस पर है ये भी तो बताना था

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  28. रौशन जी, उस पर गुर्राईये जो आपसे तगडा न हो , जिस पर गुर्राने से पहले आपको पता हो कि ये मेरा कुछ नहीं बिगाड सकता :)

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  29. सतीश जी आपकी कद-काठी कैसी है
    गुर्राने पर आप कैसे रिएक्ट करते हैं :-)

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  30. कद तो ठीक ठाक है पर काठी का पता नहीं है आज तक काठी का सिर्फ नाम सुना है देखा नहीं है :)

    अरे ये तो हम लोग चैट बॉक्स की तरह रचना जी के ब्लॉग का इस्तेमाल कर रहे हैं। रचना जी बुरा मान जायेंगी :)

    चलिये अब सो जाउं, वरना बच्चे मुझ पर गुर्रायेंगे और पत्नी अलग कि न जाने क्या टिपिर - टिपिर टीपते रहते हैं :)

    मजेदार रहा आज रचना जी के ब्लॉग पर कई बार आना। शायद यह भी ब्लॉगिंग का एक अनोखा रंग है।

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  31. तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ.... तालियाँ....

    इतनी बजा दी, अब तो हमें भी साहित्यकार बना दो...

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  32. टाइमखोटीकार कौन बोला, जी ?
    2007 से तो इस पदवी पर मेरा कब्ज़ा है !
    तालियाँ .. नहीं जी स्माईलियाँ !!

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  33. अमर जी, अब आपकी ये टाईंमखोटीकार की पदवी छिनने जा रही है क्योंकि ठेर सारे टाईमखोटीकार इस बात पर टाईम खोटी कर रहे हैं कि अगला कौन बनें :)

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  34. इस पोस्ट के मकसद को अगर रोशन और सतीश पंचम ने "जी " लिया तो पोस्ट लिखना सार्थक हुआ .
    और रही बात टाइमखोटीकर उपाधि कि तो एक प्रशन था "किसका टाइम खोटी कर " अपना या जो उसको पढता हैं उसका . ये साफ़ यानी क्लीयर कर दिया जाए और फिर उपधियाया जाए

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  35. @ एक प्रशन था "किसका टाइम खोटी कर " अपना या जो उसको पढता हैं उसका .

    रचना जी ये तो यक्ष प्रश्न है। बेहतर हो इसे अनुत्तरीत ही रहने दिया जाय। क्योंकि अनुत्तरीत प्रश्नों की भी एक सुंदरता होती है ।

    रही बात मेरे द्वारा इस पोस्ट को जी लेने की तो हां , ये सच है काफी अच्छा लगा इस दोतरफा कमेंन्टबाजी से।

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  36. किसका.. टाइम ?
    अरे, अपने अपने मन की मर्ज़ी के मालिकान का !
    वस्तुतः यह टाइमखोटी तब होता, जब पाठ्क अपने को लेखक साबित करने में
    और कीबोर्डधारी अगले को पाठक मनवाने में हलाकान होते रहते हैं !
    हार कोई न मानता, बेचारे कम्प्यूटर का वक़्त जाया होता वह अलग से !
    नतीज़ा निकला कुछ नहीं, तो हुआ न टाइम खोटी ?

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  37. हम सोचते थे कि साहित्यकार कहलवाने का ठेका सिर्फ हिन्दी साहित्य वालों को है (हम अपनी जुगाड़ में थे, इसी कारण साइंस छोड़कर हिन्दी साहित्य में घुसे)
    क्या कोई भी लेखक नहीं बचा?
    परिभाषा इतनी कि हम जिन्हें साहित्यकार कहते हैं उनको सामने रखकर अपनी तुलना करें।

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  38. इत्ता सरल: तो लिजिये-

    बहुत आसान हैं -ऐसे नहीं- बहुत आसान है.....

    -बन गये.

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